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शनिवार, 24 सितंबर 2011

फासले

नमस्कार   दोस्तों ..
       आज एक नया प्रयाश कर रहा हूँ .एक कहानी लिखने की कोशिश कर रहा हूँ ...अगर अछि लगे तो जरूसे अपना कमेन्ट कीजिये ....
                  
            "   प्यार  हमको  भी  है ,प्यार  तुमको  भी है तोह  क्यों  इतने  गिले  हो  गए
               बेवफा  हम  नहीं , बेवफा  तुम  नहीं , तोह  यह  क्या  सिलसिले  हो  गए
              चलते  चलते  कैसे  यह  फासले  हो  गए , क्या  पता  कहा:  हम  चले.......... "
 शिला के म्यूजिक सिस्टम पर ये गाना बज रहा था तभी शिला ..अपने जीवन की गहराई मैं खो चुकी थी ......... फिर से एकबार ............वही बाते उसके दिलो दिमाग मैं खलबली सी मचा रही थी ...
          आजसे करीब दस साल पहले की बात थी एक दिन शिला शोपिंग करने के लिए मार्केट गयी थी और एक साडी के शो रूम मैं उसकी और राघव की अचानक मुलाक़ात हुई थी ...राघव उस शो रूम मैं सेल्स मेन की नौकरी करता था ..शिला उसीके  काउंटर पर एक साड़ी खरीदने के लिए  आगई ..राघव ने उसकी और देखते ही अपनी पसंद की पहली साड़ी दिखाई और शिला को भी वही साड़ी पसंद आगई ..तभी अचानक शिला ने उससे कहा आपकी और मेरी पसंद  काफी मिलती है ...तभी राघव भी शिला को एक नज़र देखकर ..देखता ही रह गया ....कितने ख्याल उस एक नज़र मैं उसके दिल और दिमाग से चले गए उसे पताही नहीं चला ...और भी ग्राहक वहा खड़े थे उसका उसे पता ही नहीं चला बस वो शिला को देखता ही रहा ...अचानक पीछे से किसीने कहा राघव ,,,,,,,तभी वो नींद से जगा हो वैसे अपने आप को सँभालने मैं लग गया ..उसकी निगाहे अभी भी शिला को ढूंढ़ रही थी ...मगर शिला तो वहा से चली गयी थी ...अब वो हर ग्राहक मैं शिला को ही ढूंढ़ रहा था ..वो यही सोच रहाथा की कब फिर से उसी लड़की से मुलाकात हो जाये ....क्योकि ....
 इस एक बात ने राघव की जिन्दगी को ही बदल दिया और बिना कुछ जाने ही वो मन ही मन मैं  शिला से प्यार करने लगा ...
                 कुछ दिन बाद वो अपनी बाइक से शो रूम पर जा रहा था तभी उसने स्टैंड पर शिला को देखा बिना सोचे वो वहा पहुच गया ...शिला के पास जाकर पहले क्या बात करे उसी अस्मासंज मैं वो फिर से सुन मून खड़ा हो गया ...तभी शिला ने उसे कहा हाई ...बस उसी हाई........ hallo   से उनकी  दोस्ती कब प्यार मैं बदल गई पता ही नहीं चला ....
                      दोनों के घर मैं भी उनकी संबंधो को कोई एतराज का सामना नहीं करना पड़ा क्योकि ..शिला और राघव दोनों ही माध्यम वर्गीय परिवारसे ही थे ..और ज्यादा कुछ .जाती मै भी फरक नहीं था ....परिवार की मर्जी से ही दोनों ने बहुत ही सादगी से शादी कर ली ...
      राघव अपने छोटे भाई और माता पिता के साथ ही रहता था ...शिला ने भी उसी घर मैं सयुक्त कुटुंब मैं रहना पसंद किया ...इस बात को लेकर राघव भी बहुत खुश था ...
         अब राघव ने नौकरी छोड़ कर अपना ही बिजनेस सुरु करना चाह ...रहाथा ..तभी उसके गाँव मैं कुछ पुस्तानी जमीं थी जो बरसो से पड़ी थी उसको बेचकर एक नया बिजनेस सुरु कर दिया ....
बिसनेस मैं दिन बदिन उसकी तरक्की होने लगी ..और कुछ ही साल मैं वो कुछ ज्यादा ही ऊंचाई पर पहोच गया ...
                              आज  उसके  पास   वो  सबकुछ  था  जो  एक अमिर इन्सान के पास होना चाहिए  ..
मगर हां उसके पास अब वक़्त की बहुत कमी रहने लगी थी ...और जो वक़्त वो शिला को देना चाहता था वाही वक़्त अब उसे पैसे के पीछे भागने में लगाना पड़ता था ....और इसी मायाजाल मैं वो  धीरे धीरे शिला  से  कुछ ज्यादा ही दूर ...हो गया था ....
                    सिला के पास आज भौतिक शुख की कोई कमी नहीं थी फिर भी वो अन्दर ही अन्दर कुछ कमी सी महसूस कर रही थी ... फिर भी उसे राघव के माता पिता और भाई के प्यार मैं .....वो अपनी इस कमी को कुछ कम महसूस कर रही थी ...क्यों की वोह जब इस घरमें आई थी तब उसने राघव के सयुक्त कुटुंब मैं ही रहने का निर्णय किया था ..वाही आज उसका सबसे बड़ा साथी बन गया था ...जब वो इस घर मैं आई थी तब राघव का छोटा भाई वरुण करीबन पंद्रह सोलह सालका ही था ..उसकी और शिला तब से कुछ ज्यादा  ही बनती थी..वो अपने देवर को अपने बेटे की तरह ही प्यार करती थी ..और वरुण के साथ कुछ ज्यादा ही घुलमिल गयी थी ,,,आज शिला का बेटा रूद्र भी ८ शाल का हो गया है ...और वरुण भी २५ से २६ साल का नौजवान हो गया था . ... 
         
               वरुण आज अपनी भाभी से अपनी एक फ्रेंड के बारे मैं बात कर रहा था ...और बहुत चुपके से ..किसी और को घर मैं पता न चले इस लिए दोनों अकेले ही शिला के रूम मैं ही बाते कर रहे थे ...तभी अचानक राघव वह रूम मैं आजाता है ...और दोनों चुप हो जाते है ..और राघव वहांसे चला जाता है ...उस समय तो राघव शिलासे कुछ नहीं कहता लेकिन उसके मन मैं एक अजीबसी ..शंका ने जन्म ले लिया ..मगर उसी वक़्त वो अपने आप को कोशने लगा ..ये कैसी हिन् सोच है मेरी ...
ऐसा कभी नहीं हो सकता ...
                     फिरसे वाही रफ़्तार से उनकी जिंदगी  गुज़रने लगी थी .........
                सुबह फिर से वो अपनी ऑफिसअपने काम पर चला गया ..ऑफिस मैं वो अपना काम कर रहता की ..उसके फोन पर घंटी बजी रोज तो वो फोन पर बस काम की ही बात करके फोन कट देता था मगर आज वो कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट से बात कर रहा था ..क्योकि आज फोन पर उसका बहुत ही अच्छा मित्र अंशुमन था .. ..मगर पढाई के बाद अंशुमन लन्दन चला गया था ..राघव ने उसे अपने ऑफिस एड्रेस दिया और उसे ऑफिस बुला लिया ...
आज अचानक से उसे देखकर राघव ..अचंबित हो गया दोनों ने कुछ बाते की और राघव उसे घर ले आया ..
              राघव ने घर मैं सबका अंशुमन से परिचय करवाया ...तभी राघव ने देखा की शिला अंशुमन देखकर कुछ चौंक सी गयी थी मगर उसने अपने आप को संभाल लिया और नोर्मल हो गयी ..कुछ बाते हुई  ...और अंशुमन वहासे चला गया ..फिरसे मिलने की बात करके .वो जुदा हुए ..
               मगर यहाँ शिला कुछ ज्यादा ही परेसान लग रही थी .उसमे अचानक से कुछ ज्यादा ही बदलाव आरहे थे ..क्योकि अंशुमन वाही इन्सान  था जो शिला से एक तरफा प्रेम मैं पागल था ..उसने शिलासे कई बार इस बात को लेकर शिला को परेसान किया था .एक बार तो उसने अपने खून से शिला को ख़त भी . लिखाथा... बे पनाह दीवाना था वो शिला का .. और इसी परेशानी के चलते शिला  और उसके परिवार को  सहर बदल देना पड़ा था ... और आज अचानक उसी इन्सान को अपने पति के मित्र के रूप मैं देखकर उसके दिलो दिमाग पर भूकंप सा मच गया था ...वो अपने आप को संभालने मै ही लगिथि ..वाही राघव अचानक कमरे मैं आता है .शिला को परेसान देखकर वो उससे उसकी तबियत के बारे मैं पूछ ताछ करता है ..मगर शिला भी उससे तबियत कही बहाना बताकर वो बात छुपा लेती है ...मगर फिरसे एक बार राघव शिला के बारे मैं कुछ गलत सोच और एक अजीब सी शंका ..उसके मन को परेसान करने लगी ..थी ..
               और इस तरफ अंशुमन भी  इतने साल बाद ..अचानक से   शिला को देखकर ......बेचैन ..था .. अचानक  से  फिर  से  अपने  प्रेम को अपनी दोस्त के पास  देखकर फिरसे वो यादें
उसके दिमाग  मैं....हावी  होने लगी थी  जिस लड़की के लिए उसने आज तक सादी नहीं की थी वाही लड़की आज अपने ही मित्र की दुल्हन रूप मैं देखकर वो दुविधा मैं पड  गया ... क्या करना क्या नहीं उसके कुछ समजमैं नहीं आ रहा था ..फिर से वो पुराणी यादों को भुलाने के लिए ..शराब के शहारे मैं चला गया .....
        इधर ..राघव शिला की बेचैनी को साफ देख रहाथा.. क्यों अचानक से इतना सारा बदलाव आज तक जो सारी एकलता को भुलाकर अपने सारे  परिवार के सुविधा मैं अपना शुख देखने वाली औरत और ... पुरे घर को खुश रखने   वाली उसकी पत्नी गुमसुम क्यों हो गयी है यही सवाल राघव को ..परेसान कर देता था ...
             राघव अब कुछ ज्यादा ही घर के तरफ ध्यान दे  रहा था ..उसमे कुछ ज्यादा ही बदलाव आरहा था ...वो कई बार तो कुछ अजीबसी हरकते  करने लगता अचानक ऑफिस से फोन करके वो शिला की खबर पूछता था ...घर के लैंड लाइन फोन पर फ़ोन करके वो शिलासे बात करके पता लगाता था की शिला घरमें ही है  या नहीं .. वो अपने बिजनेस मैं भी पूरा ध्यान नहीं लगा सकता था ..
              यहाँ  वरुण भी ...भाभी की परेशानी को साफ महसूस कर रहा था ... मगर क्या बात थी उसे भी पता नहीं था ...फिर भी उसने एक बार अपनी भाभी से बात करने का फैसला किया ...क्योकि पुरे घर का वातावरण ही बदल गया था ....और इस वज़ह से वो भी परेसान था ...
                 सबके मन मैं कुछ न कुछ अंजना सा  डर था ..क्या है ..क्यों है ये अजीब सी हालत कोई नहीं जानता  था ..मगर हां सब के सब बेचैन जरूर थे ...
                 वरुण  आज अपनी भाभी से इस सिलसिले मैं बात करने लिए भाभी के कमरे मैं जाता है ..वहा वो अपनी भाभी को किसी से फोन पर बात करते हुए सुनता है और बहुत ही गभारई हुई
महसूस  करता है ..और तभी वो पूछता है भाभी क्या बात है आप कई दिनों से परेसान लग रही हो ..? और किस्से आप फोन पर बात कर रही थी ..आप कुछ प्रॉब्लम मैं लगाती है ..
            शिला उससे छुपाने की कोशिश करती है ..मगर वो अपने आपको रोने  से रोक नहीं पाती ..
 और वरुण भी अपनी भाभी को सम्हालने लिए उनके पास जाता है ..शिला पूरी बात वरुण को बताती है ..भाभी ने कहा आज अन्सुमन का ही फोन आया था........... और वोह मुझसे मिलाना चाहता है ...        ..वरुण अपनी भाभी को कहता है मैं भी आपके साथ चलूँगा ...दोनों साथ मैं ..अन्सुमन से मिलने  के लिए उसके बताये हुई जगह पर जाते है ...मगर ये क्या ..वहा तो अन्धकार छाया हुआ ...अचानक उनके जाते ही ..चारो तरफ से रौशनी ही रौशनी हो जाती है ...और वो ये मंज़र देखकर चौक से जाते है ..क्योकि राघव भी वहा मौजूद था ...और अन्सुमन  आज अपनी शादी का एलान करने वाला था ....और इसकी ख़ुशी मैं ही उसने आज ये पार्टी दे रखी थी ...
                    तभी राघव पूरी बात बताता है ...कई दिन से तुम्हारी परेसनी मुजसे बर्दास्त नहीं होरही थी
इसलिए जब पहली बार अन्सुमन को देखकर चौक सी गयी थी तभी मुजे कुछ .लगा ..और इधर अन्सुमन भी मुझसे बात करने से कतराता था ..तभी मैंने अन्सुमन से इस बारे मैं बात की और पता चला की अन्सुमन भी इस बात को लेकर परेसान था और वो भी बहुत  शार्म सही महसूस कर रहता और उसने पूरी बात मुजे बताई वो यहाँ शादी करने के लिए ही तो आया था ..तभी सारे फासले दूर करने के लिए ये प्लान बनाया था ..........   
                      और सभी साथ मिलकर अन्सुमन को शादी की अडवांस  मैं बधाई ...देते है ..मगर यर क्या अन्सुमन जिससे सादी करने जा रहता वोह....................  लड़की ..?  ......................................................

























..........................................................सोच मैं पड़ गए .......क्या? ..वोह लड़की भी बहुत सुन्दर  ही थी ....
 कैसी लगी ये कहानी .....सभी पात्र काल्पनिक ही है ....वैसे तो अंत कुछ और सोचा था मगर ...


                                 

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