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रविवार, 11 सितंबर 2011

परिवर्तन संसार का नियम है

दोस्तों ..नमस्कार ..........
                  जब कभी भी ..यहाँ होते है ..न जाने कैसे कोई न  कोई ...विषय मिल ही जाता है लिखने के लिए ..
                     और कुछ न कुछ बदलाव भी आजाता है ...इस लिखावट मैं ...आप भी कभी प्रयत्न करे कुछ लिखने का ..आपके अन्दर के मौलिक विचार अपने आप ही आप के हाथसे ब्लॉग  पर उतर ही जायेंगे ..और आपके जीवन मैं भी कुछ न कुछ बदलाव भी जरूर आ ही जायेगा ...
                                    क्योकि ...परिवर्तन संसार का नियम है ...  और      जरूरी भी है ..अगर समय के अनुसार हम अपनी किसी भी बात मैं बदलाव नहीं ला पाते है ..तो ..हमें कुछ न कुछ मुस्किलो का सामना करना ही पड़ता है ....
                  कितना सारा बदलाव आ गया है ...सिस्टम मैं ...भी ...
       एक छोटीसी बात से सुरु करे तो ...आजसे पहले जब टेलीफोन ..मोबाइल ईमेल ..sms  की सुविधा नहीं थी तब हम ख़त के जरिये ...हम अपने सन्देश और अपने अच्छे या तो ....प्रसंगों के आमंत्रण भी भेजा करते थे ...
      और इन्ही खतो   के जरिये अपने जज्बातों को भी .. भेज देते थे ....ख़त आते ही कभी लोग अपनी ख़ुशी ज़ताते थे ..तो कही अपने दुःख को भी बाट लेते थे ...ख़त ही बात करने का  जरिया था .
ख़त  ही बोलता था ..और ख़त ही जवाब भी देता था ... लोग डाकिए का इन्जार करते रहते थे ...
    और आज इस ईमेल और sms के ज़माने मैं ..कभी मेल या sms कब आजाता है पढ़ा भी जाता है या फिर डिलीट कर दिया जाता है पता ही नहीं चलता ...
 फिर भी ...सोसिअल नेटवर्क का बेस्ट जरिया आज यही तो बना हुआ है ...इसी के जरिये हम आज जाने और अनजाने कितने ही लोगोसे अपने नए रिलेसन बना पाते है ...क्यों की परिवर्तन ही संसार का नियम है ...
...................ये तो हुई एक मामूली से बदलाव की बात ......
आप ध्यान से मन लगाकर सोचिये कितने सरे बदलाव हमें अपने  आसपास देखने को मिलेंगे ....तो ढूंढते रहिये ......... 

परिवर्तन मुझे कभी पसंद नहीं आया ,


यह बात अलग है के आदत पड़ ही जाती है कुछ रोज़ बाद ,

हम तो बदलना नहीं चाहते थे कभी ...मगर क्या करे ..
वक़्त ने ही कहा बदल जाओ ..फिर बदल ही गए अपने आप ..










क्योकि लोग कहते है की परिवर्तन ही संसार का नियम है ....

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