आज से लेकर .......ये पूरा साल ....
चारो तरफ ..जहा देखो वहा ..भ्रस्टाचार ...घोटाले ...और देश की बहुत सी तकलीफों के बारे मैं बातें हो रही है ...
..........................और हर बार कुछ नया होने की उम्मीद भी जग जाती है ...लोगो मैं ...क्योकि अन्नाजी हो या बाबा रामदेव ...जो भी इस बात को छेड़ता है लोग उसके समर्थन मैं जुट जाते है ...
क्योकि ......... यह सही मैं ...जनता की दर्द वाली नब्ज़ है ..और कोई भी अगर हमारी दर्द वाली नब्ज़ पर हाथ रखेगा ...तो यही होगा ....और होना भी चाहीये ....लेकिन क्या है इस दर्द ...का ...कायमी इलाज...? वो हम ढूंढ़ रहे है .. मगर ...कही दूर दूर तक ..नज़र नहीं आ रहा ...ऐसा है क्या...?
लगता भी ऐसा ही है ...लेकिन क्या करे प्रयाश तो करते रहना पड़ेगा ....वर्ना ..?
...........................हम भी ...जब जब कोई ..इस बात को पकड के आगे चलने वाला होता है तब तक ही ..पीछे रहते है लेकिन जब ..आगे वाला एक चला जाता है या तो .समर्पण कर देता है तो ..हम तो इस बात को ही भूल जाते है ..के कोनसे दर्द को मिटने लिए हम सब साथ थे ....यही होता हैं ना..?क्या मैं गलत बोल रहा हूँ..........कही हमें ऐसा नहीं लगता ..की कोई भी आकर हमें थोडासा झूठा ही सही दिलासा दे जाये तो हम अपने दर्द को भूल जाते है ...कब तक चलेगा ये सब ...क्या हम कभीभी अपने दिमाग से आगे नहीं बढ़ सकते ....जब हमारी एकता की वजह से एक आदमी के सामने पूरी सरकार झुक सकती है ....तो ये एकता और क्या नहीं कर शकती....?
ये तो हुई ...हमारी ...बात ...
लेकिन क्या ये लोकपाल हो या कोई और किसी ज़टिल कानून के बन जाने से ये सभी दर्द जिसकी हम हर बार चर्चा करते है उससे मुक्ति मिल पायेगी ...
लेकिन हां मेरे पास एक आईडिया है जो कम से कम ये पैसो वाला भ्रस्ताचार को बे नकाब कर शकता है .....हलाकि मैं खुद बहुत आम आदमी हूँ ..इस लिए हमारी बात ..तो कोई ...ध्यान भी नहीं देगा ..फिरभी आप तो मेरे दोस्त है इसलिए आपसे तो उम्मीद रख सकता हूँ..केवल ... सोचने के लिए ...?
लेकिन क्या ये लोकपाल हो या कोई और किसी ज़टिल कानून के बन जाने से ये सभी दर्द जिसकी हम हर बार चर्चा करते है उससे मुक्ति मिल पायेगी ...
लेकिन हां मेरे पास एक आईडिया है जो कम से कम ये पैसो वाला भ्रस्ताचार को बे नकाब कर शकता है .....हलाकि मैं खुद बहुत आम आदमी हूँ ..इस लिए हमारी बात ..तो कोई ...ध्यान भी नहीं देगा ..फिरभी आप तो मेरे दोस्त है इसलिए आपसे तो उम्मीद रख सकता हूँ..केवल ... सोचने के लिए ...?
मेरा सिर्फ पञ्च मुद्दीय कार्यक्रम है ...
१. हमारी करन्सी मैं से ५०० ..और १००० रुपये के नोट वापस लिए जाये ...
२. रुपये १००० से ज्यादा का कोई भी व्यहवार केवल बैंक से चेक या नेटबैंकिंग के द्वारा ही हो ..
. चेक से भी ..जोभी पैसा दिया जाये उसका पूरा विवरण चेक मैं किया जाये ..
३ .भारत के सभी नागरिक की ..सम्पति का पुरे विवरण के साथ घोषित किया जाये .और उसकी पूरी जानकारी डिपार्टमेंट को दी जाये ..हर साल उसमे बढौती या कटौती का ब्यौरा लिया जाये ...
४. चार यतो पञ्च महीने मैं जो भी नोट ५०० ....और १००० के हो वो बैंक मैं जमा किये जाये ...
५. जो भी कालाधन यानि ब्लेक मोनी है उसपर केवल २० या तो २५% लगा कर उसे .जायज़ करार कर दिया जाये ...और इसके लिए समय मर्यादा दी जाये ..उस समय के बाद जो भी कला धन हो उसे जप्त किया जाये ..
6 . और इस समय के बाद किसी भारतीय नागरिक के पास 10000 रुपये se ज्यादा अगर नकदी पर प्रतिभंध लगाया जाये और उस पर सख्त कानून बनाया जाये ...
6 . और इस समय के बाद किसी भारतीय नागरिक के पास 10000 रुपये se ज्यादा अगर नकदी पर प्रतिभंध लगाया जाये और उस पर सख्त कानून बनाया जाये ...
..अगर सिर्फ और सिर्फ ..इतना ही किया जाये तो ..भ्रस्ताचार अपने आप ही बेनकाब हो जायेगा ....
और इससे और भी कई दर्द जैसे अपहरण ... फिरौती ..लूट ..चोरी .नकली नोट... से भी हमें राहत मिल शक्ति है .... क्योकि कोई अपहरण करता है तो फिरौती के पैसे .. चेक सेतो नहीं ले पाए गा...
साथ साथ मैं सही . गरीब . जो सही मैं जरूरियात मंद है उनका भी पता चल जायेगा ..
साथ साथ मैं सही . गरीब . जो सही मैं जरूरियात मंद है उनका भी पता चल जायेगा ..
हां इसके लिए हमारे बैंक सिस्टम मैं बहुत ज्यादा बदलाव लाना होगा ...वैसे भी हमारे बैंक बहुत आधुनिक तकनीक ..कर रहे है ...तो ये तो बड़ा आसान है ...
इसमे भी ..खुछ ना कुछ खामी हो सकती है ..या तो परेसनिया भी हो सकती है मगर ..इस पञ्च मुद्दों को लेकर अगर हमारे बुध्धि जीवी ..या तो अर्थ शास्त्री ..अगर कोई नया ...प्रोजेक्ट पेश करते है तो जरूर ..रिजल्ट मिल शकता है
मगर ये तो हमें उलज़ाने के लिए वोट बैंक की राजनीति हो रही है . और हम भी नए नए कानून जो हमें और भी उल्ज़ाते रहे उसके लिए ही लड़ते रहते है ..उसीका तो सब लाभ लेते रहते है ...सभी लोग ..
अगर ..आपको मेरा ...विचार अच्छा लगे तो जरूर से शेयर करना अपने दोस्तों के साथ .........क्योकि ..एक नयी क्रांति की लहर जब तक नहीं उठेगी तब तक हम उलज़ते ही रहेंगे ....
तारों में अकेला चाँद जगमगाता है,
मुश्किलों में अकेला इंसान ही डगमगाता है,
कांटो से मत घबराना मेरे दोस्त ,
क्युकी काँटों में ही एक गुलाब मुस्कुराता है.. ......

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