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बुधवार, 11 अप्रैल 2012

some photo image & painting

नमस्कार  मित्रो ...आज कुछ मेरी पसंदीदा तस्वीर  यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ .हर तस्वीर कुछ न कुछ कहना चाहती है ..मैंने प्रयास किया है उनकी आवाज़ को सब्द देने का ..
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 ज़िन्दगी का ये सफ़र भी यूँ ही पूरा हो गया
 इक ज़रा नज़रें उठायीं थीं कि पर्दा हो गया 
गुलाब की पत्तियां पहले ही झड़ चुकि थीं

बची खुची खुशबु भी चुरा ले गयी पापी हवा 

 

बहुत दिनों से कोई हवा इधर से नहीं गुज़री है,



                                           बाग में सर झुकाये खड़ा हूं दरख्तों की तरह,









है बात वक्त वक्त की चलने की शर्त है



                                               साया कभी तो कद के बराबर भी आएगा

















किस को अपना दुःख सुनाएँ किस से अब मांगें मदद



                                      बात करता है तो वो भी इक नयी ज़ंजीर की







कोनों में काँपते थे अँधेरे जो आज तक



सूरज को ज़र्द देखा तो मगरूर हो गए





जिन कायदों को तोड़ के मुजरिम बने थे हम



वो क़ायदे ही मुल्क का दस्तूर हो गए




मैं अपनी धुन में आग लगाता चला गया



सोचा न था कि ज़द में मेरा घर भी आएगा






ज़िन्दगी क्या है और मौत क्या



शब् हुई और सहर हो गयी






इक ज़माना था कि जब था कच्चे धागों का भरम



                                          कौन अब समझेगा कदरें रेशमी ज़ंजीर की





 नया सवेरा नयी किरण के साथ


नया दिन एक प्यारी सी मुस्कान के साथ 



रातें गुमनाम होती है,


                                                           दिन किसिके नाम होता है,

                                                     हम ज़िंदगी कुछ इस तरह जीते है




रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है,


ना चाहते हुए भी प्यार होता है,

क्यू देखते है हम वो सपने,

जिनके टूटने पर भी उनके सच होने का इंतेज़ार होता है?



रोक लें या बढने दें..


थाम लें या गिरने दें..

वस्ल की लकीरों को..

तोड दें या मिलने दें..

रास्तों की मर्ज़ी है








अजनबी कोई लाकर..


हमसफ़र बना डालें..

साथ चलने वालों की..

राह जुदा बना डालें..

या मुसाफ़तें सारी..

खाक मे मिला डालें..

रास्तों की मर्ज़ी है..




बैठे बैठे ज़िन्दगी बरबाद ना की जिए,



ज़िन्दगी मिलती है कुछ कर दिखाने के लिए,


रोके अगर आसमान हमारे रस्ते को,


तो तैयार हो जाओ आसमान झुकाने के लिए




 
चाँद की महफ़िल में अनजाने मिल गए,



हमने देखा तो सब जाने पहचाने मिल गए,


मैं बढता गया सच्च के रस्ते पर,


वहीँ पर मुझे सभ खजाने मिल गए





आज़मायेगी लम्हा-लम्हा दोस्ती ये हमारी..


वक्त की कोई घडी, वादे भरी बात मांगेगी..



हम अकेले रहें, या रहे भीड में..

आरज़ू दिल की तो बस तेरी मुलाकात मांगेगी






 
जाने क्यूँ लोग हमें आज़माते है,



कुछ पल साथ रह कर भी दूर चले जाते है,


सच्च ही कहा है कहने वाले ने,


सागर के मिलने के बाद लोग बारिश को भूल जाते है






ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो,



है रात तो सुबह का इंतज़ार करो,


वोह पल भी आयेगा जिसका इंतज़ार है आपको,


बस रब पर भरोसा और वक़्त पर ऐतबार करो




पता नहीं कौन से मोड पर..


ज़िन्दगी हम से तुम्हारा साथ मांगेगी..



रास्तों के पत्थर ना गिरादें मुझे..

इन लडखडाती राहों से डर के तुम्हारा हांथ मांगेगी










कहीं खो दिया, कहीं पा लिया..


कहीं रो लिया..

कहीं गा लिया..

कहीं छीन लेती है हर खुशी..

कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है..






बे-ज़मीं लोगों को..



बे-करार आंखों को..


बद-नसीब कदमों को..


जिस तरफ़ भी ले जायें..


रास्तों की मर्ज़ी है..




काश वो समझते इस दिल की तड़प को,



तो यूँ हमें रुसवा ना किया होता,


उनकी ये बेरुखी भी मंज़ूर थी हमें,


बस एक बार हमें समझ लिया होता






हस्ते रहें आप हज़ारों के बीच में,



जैसे हस्ते हैं फूल बहारों के बीच में,


रोशन हो आप दुनिया में इस तरह,


जैसे होता है चाँद सितारों के बीच में






ये जो ज़िन्दगी की किताब है..


ये किताब भी क्या खिताब है..

कहीं एक हसीं सा ख्वाब है..

कही जान-लेवा अज़ाब है..






 आप हमें रुलादो हमें गम नहीं,



आप हमें भुलादो हमें कोई गम नहीं,


जिस दिन हमने आप को भुला दिया,


समझ लेना इस दुनीया में हम नहीं





ना मुस्कुराने को जी चाहता है,



                                                        ना आंसू बहाने को जी चाहता है,


                                                         लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में,


                                               बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है




चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,



कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,


उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,


शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली





आँखों से आंसू न निकले तो दर्द बड जाता है,



उसके साथ बिताया हुआ हर पल याद आता है,


शायद वो हमें अभी तक भूल गए होंगे,


मगर अभी भी उसका चेहरा सपनो में नज़र आता






वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ..


वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..



सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..

मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ..











मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..


तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..



हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..

मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..

सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..

मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..

मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..

तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..
















दुनिया के कई अजीब रंग है,



इन रंगों मैं रंग जाना है,


प्यार हर किसी से हम करे गे… मगर !


किसी एक की आंखों मैं खो जाना है






एक दिन जब हम दुनिया से चले जायेंगे,



मत सोचना आपको भूल जायेंगे,


बस एक बार आसमान की तरफ देख लेना,


मेरे आँसू बारिश बनके बरस आयेंगे





ये मेहफ़िल, मस्तियां सब तेरे बिन उदास..


सिर्फ़ तन्हाइयां हैं.. जायें जहां..

हां ये शहर, बस्तियां सब तेरे बिन उदास..

सिर्फ़ वीरानियां हैं.. जायें जहां..

जरा बता रहे.. तेरे बिना जीना कुछ भी नहीं..








दिल मेरा हर जगह.. बस तुझे ढूंढें यार..


झील, पर्वत, हवायें हैं मेरे गवाह..

शामें हों या सुबह.. हम तुझे ढूढें यार..

आते-जाते ये मौसम हैं सारे गवाह..

जरा बता रहे.. तेरे बिना जीना कुछ भी नहीं..










दरवाजे पर आहट सुनके उसकी तरफ़ ध्यान क्यूं गया..


आने वाली सिर्फ़ हवा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..








 कर दिया दीवाना दर्द-ए-कश ने..


चैन छीना इश्क के एह्सास ने..

बेख्याली दी है तेरी प्यास ने..

छाया सुरूर है.. कुछ तो ज़रूर है..












ना कोई नाता.. अब दिन और रात से..




हर लम्हा तड्प, हर लम्हा तेरी प्यास है..

जब से मैं हूं जुदा तेरे साथ से..



यादें.. यादें.. यादें.. तेरी यादें.. यादें.. यादें..

बातें.. बातें.. बातें.. तेरी.. बातें.. बातें.. बातें..



उन लम्हों को कैसे ज़िन्दा करूं..

सांसें मैं लूं फ़िर भी पल-पल मरूं..









 हम हवा नही जो खो जाएँगे,



वक़्त नही जो गुज़र जाएँगे,


हम मौसम नही जो बदल जाएँगे,


हम तो आँसू है जो खुशी और गम दोनो मे साथ निभाएँगे.





 हल्की सी आहट हो तो लगे तुम आगये..


क्यूं तन्हा छोडकर मुझको रुला गये..







तुम चांद बनके जानम, इतराओ चाहे जितना..


पर उसको याद रखना, रोशन हो जिसके पीछे..



वोह बदगुमा है खुद को, समझे खुशी का कारण..

कि मैं चेह-चहा रहा हूं, अपने खुदा के पीछे..







 हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर,



वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर,


कल वो कह गये भुला दो हुमको,


हमने पुछा कैसे!!!!











शाम का आंचल ओढ के अयी.. देखो वो रात सुहानी..


आ लिखदें हम दोनो मिलके.. अपनी ये प्रेम कहानी..






जब कोई इतना खास बन जाए,



उसके बारे मे ही सोचना एहसास बन जाए,


तो माँग लेना खुदा से उसे ज़िंदगी के लिए,


इससे पहले के वो किसी ओर की साँस बन जाए.









बे-ज़मीं लोगों को..


बे-करार आंखों को..

बद-नसीब कदमों को..

जिस तरफ़ भी ले जायें..

रास्तों की मर्ज़ी है..


उजाले भी ऐसे मिले कि रोशनी से जल गये हम..


इन उजालों से छिप कर कोई हसीन रात मांगेगी..







कहीं आंसू की है दास्तान..


कहीं मुस्कुराहटों का है बयान..

कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये..

एक अजीब सा ये निकाब है..






कहीं खो दिया, कहीं पा लिया..


कहीं रो लिया..

कहीं गा लिया..

कहीं छीन लेती है हर खुशी..

कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है..




कहीं छांव है, कहीं धूप है..


कहीं बरकतों की हैं बारिशें..

तो कहीं, और ही कोई रूप है..



ये जो ज़िन्दगी की किताब है..

ये खिताब लाजवाब है..

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