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शनिवार, 3 सितंबर 2011

..राह और मंजिल

कई दिनों  से सोच रहा हूँ.....लेकिन कुछ मिल नहीं रहा  ......क्या .....?


  ............................अरे यार आपके ही लिए कुछ ऐसा विषय ...जिसके बारे मैं आप भी सोचने पे मजबूर .हो जाये ..और न चाहते हुए भी आप ...उस पर कुछ न कुछ  कोम्मेन्ट करने पे मजबूर हो जाये .....लेकिन क्या करू गोस्तो ...ऐसा कोई विषय ही नहीं मिल रहा ...फिर भी एक प्रयास करता हूँ ...अगर पसंद आये तो कम से कम एक कमेन्ट की आश तो रख ही सकता हूँ...........

      ...........हम लोग ..अपनी  भावना  को कितना दबाते रहते है ...?कभी खुलके हम किसीको भी कुछ कह पाते है ? ..जो भी अन्दर होता है क्या हम वो ..बहार भी पेश कर पाते है ....?
......कदाचित नहीं ... लेकिन क्यों ऐसा नहीं कर पाते है ..क्योंकी हम किशी की भी भावनाओ को ठेश नहीं पहोचाना चाहते ...या तो हम खुद उस बात को कुछ न कुछ तरीके से गलत समजते है ..हमारी रूह उस बात को करने से हमें मना कर देती है ..और. हम अपने जजबातों को अन्दर ही दबा देते है ...और ज्यादा तर हम अपने ख्यालो को किसीसे छुपाते रहते है ...
               ........जैसे हम किसीको कुछ ज्यादा ही पसंद कर रहे है ..हमारे जज्बात हमें किसी की और खीचते ही चले जाते है .फिर भी हम उस बात का खुलके इकरार नहीं कर पाते ...
 किसी की बाते हमें बेहद पसंद आती है फिर भी हम खुलके अपने एहसास व्यक्त नहीं कर पाते ..हमें पता होता है ...फिर भी हम कुछ कह नहीं पाते ...ऐसा क्यों ..?
...............उसी तरह ...कई बार एसा भी होता है ..किसीकी कोई भी बात हमें जिसमे कुछ भी पसंद नहीं आती है ..दिल से हम उससे दूर ही रहना चाहते है ..फिरभी हमें उसके बारे मैं न चाहते हुए भी ..मुस्कुरा कर ..नकली एहसास जाताना पड़ता है ...क्यों ..?
.......................... क्या ..ऐसा नहीं होता है ..?क्या आपके साथ भी ऐसा कभी न कभी हुआ है ..?
 .........और इसी बात के कारण कई  बार  तो .हमारी जिन्दगी की  ..राह और मंजिल.. दोनो  ही  
बदल जाती है ....और जब भी ...कुछ समय बाद ..जब हम उसके बारे मैं सोचते है ...तो हमें भी कई बार ..एसा लगता है ..फिर भी हमें किशी न किशी कारण हमें अपने जज्बातों को दबाना पड़ता है ...
  इसी बात को लेकर हम अगर कुछ ज्यादा ही सोचे ...और देखे तो ..भावना ओको लेकर सही बात को छुपाने यतो दबाये रखने से कई बार तो पुरे देश का ...भविष्य बदल जाता है ..अगर ..
 गांधीजी ने अपनी भावना ओको दबाकर दिल की सुनी होती तो ....?
अगर ..
    सरदार पटेल ने गांधीजी की भावनोको न देखकर अपने दिल की सुनी होती  तो ... ?
अगर ...ऐसी तो कई बाते है ..जो इसी दबाव के  कारण कितने ही ............हुई है ..और इसका अच्छा यतो बुरा परिणाम आज किसी न किसी को ..भुगतना पड़ता है ...
 फिर भी दोस्तों ...

चेहरे  की हंसी  से हर  गम  छुपाओ ,   ..........               


बहुत  कुछ बोलो  पर  कुछ न बताओ ,  


खुद  न रूठो  कभी  पर सबको  मनाओ , 

राज़  है ये  जिंदगी  का बस  जीते  चले  जाओ.............

 

.. 

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