हम छोड़ चले इस महेफिल को याद आये कभी तो मत रोना ......
कभी कभी ...एसा भी ..सोचने के लिए इन्सान मजबूर होजाता है ....क्यों ...?????????????
क्योकि .........वक़्त कभी भी करवट बदल देता है .....और वैसे भी इन्सान चाहे जोभी हो वोह अपनी ...संवेदना मै कही न कही तो ज़ज्बाती होजाता है ....कभी इशी एक सब्द के कारन उसके दिल को इतनी गहेरी चोट पहोचति है की वह चोट चाहे कितने ही मरहम लगाओ ...रूज़ नहीं पाती ....
और वोह अपने पुरे जीवन को ही छोड़ देने पर मजबूर हो जाता है ....कभी आपने सोचा है .....किसी .ऐसे इन्सान के बारे मैं.................. ..?.वैसे तो एसा वक़्त कभी न कभी सब के जीवन मैं आही जाता है .... और ..कोई मजबूती से इसका मुकाबला करके ,,,अपनी नैया को पार लगा देता है ...अन्यथा ..बिच भंवर मैं ही मायुश होकर डूब जाता है ....
.............. डुबते हुए को तिनके का सहारा काफी है ..... अगर ऐसे ही वक़्त मैं आपको कोई सहारा मिलजाए केवल ...तिनके जितना भी... तो शायद .....वक़्त फिर से करवट बदल लेता है ..आपभी सोच रहे होंगे क्या..... आज ऐसी नकारत्मक बात करने लगे हो ......लेकिन आज ..मैंने..सुबह के अखबार मैं अचानक पढ़ा किसी इन्सान ने जहर पीकर अपने जीवन को समाप्त कर लिया ...तो मै उसके यानि ऐसे ..आत्म हत्या करने वालो के बारे मैं सोचने लगा ...क्यों एसा करते होंगे लोग ....?
सोच ही सोच मैं मैं भी उनकी व्यथा के बारे मैं ...लिखने पर मजबूर हो गया .......
मगर दोस्तों ...कितने भी gam हो जीवन मै ..harne से वो kam नहीं hote ..
datkar मुकाबला कर लो ...शायद वो gam कभी gam ही नहीं hote ....
. इन कीमती लम्हों को गंवाना नहीं अच्छा.....
........मायुश.............. हम भी है...... मायुश................. तुम भी हो ...
....आओ ..इस मायूशी को दो कदम साथ चलके ख़ुशीयो मैं बदल देते है ....
..एक लम्हा ही काफी है ....इस कमबख्त मायूसी को खत्म करने के लिए ....
.........................अगर किशी एक को भी इससे ...नयी राह मिलजाए .... जीने की ...तो काफी है ...
हमारी जिंदगी के लिए ....



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