नमस्कार ..मित्रो ...
आज मन करता है ..कुछ अलग लिखते है ....प्रयास किया है ..
सोचाथा ..
.दुनिया मै अकेले आये हे अकेले ही जाना था...
राह चलते ...हुए देखा यहाँ राह ढूंढने वाले गुमराह भी मिल जायेंगे ...
जीवन के सफ़र मैं हमने एक हमराही माँगा था
क्या पता था ...इस राह मैं राही बहुत ... मिल जायेंगे......
काटे बहुत थे राह मैं....राहें टेढ़ी थी पथरीले थे रास्ते ..
मगर पथ मैं साथ देने कोई ..हमराह भी मिल जायेंगे..
मंजिल दूर सही.... राह मुस्किल सही .....
अब कोई गम नहीं ..साथी ही अगर हमराह है तो ..
अँधेरे मैं भी कही न कही चिराग मिल ही जायेंगे .....
अभी सफ़र पूरा नहीं हुआ मगर .....,,,,,दोस्तों..आपके साथ से ..
जाने से पहले दुनिया मैं कुछ न कुछ अच्छा काम कर जायेंगे ..............
..................................अच्छा अभी चलते है .....मिलने की उम्मीद के साथ ....????
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