मौसम .....
कितना खुबसूरत है ....सावन का महिना ....मौसमे इश्क का महिना कहा जाता है ...तन और मन दोनों को प्रफ्फुलित करने वाला ये महिना .....है ....सही मैं ...मौसम का असर हमारे तन और मन पर कुछ ज्यादा ही पड़ता है.....कितने सारे नग्मे कितनी सारी कविताए कितने सारे ...सर्जन हमारे सर्जको ने किये है .....क्यों सिर्फ सावन के महीने के बारे मैं ...? क्योकि सावन होता ही कुछ अलग ..कोई कहता है मौसम बेईमान है ...कोई कहेगा ..मौसम आशिकाना है ....लेकिन सही मैं ये मौसम बहुत खुबसूरत होता है....और इसके बारे मैं ..जितना भी लिखा जाये उतना कम पड़ शकता है ,,,और वैसा ही मौसम आज यहाँ ...है .... इस लिए मुझे भी कुछ न कुछ लिखने का दिल कर रहा है ....
रिम जिम रिम जिम ..बारिस हो रही है ... और मिटटी की खुसबू पुरे तन और मन को मदहोश कर रही है ... एक अजीब सा नशा ....छाया है ... ...दिलो दिमाग पे ....चारो तरफ हरी हरी सी पत्तीया .... मुस्करा कर ...कह रही है ...पेड़ हस्ते हुए ...खिल रहे है ....जाने ... के वह भी आज ...कुछ अलग ही रंग मैं रंग कर अपनी ख़ुशी को .ज़ाहिर कर रहे है ......
और वहासे जब धरती की और देखते है तो वह भी ...एक भिनिसी खुसबू के साथ जाने हरे रंग की चुनरी ओढ़ के अपने तन पर ...खुसबू ..लगाके नै दुल्हन की तरह सज़ रही हो ..एसा ही लगता है ...मंद मंद ठंडी मरुत . ... जैसे उसकी झुल्फो को सहला रहा हो ...ऐसे ही ..मदहोश मौसम ...आज ..सब को मद होश कर रहा है ....
इसी ही मदहोशी मैं ..कुछ नग्मे जो ..इसी मौसम मैं सुनना बहुत अच्छा लगता है ...वही पोस्ट कर रहा हूँ ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें