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मंगलवार, 9 अगस्त 2011

वो ख्वाहिश दिल में आज भी....

नमस्कार ...........
                     स्नेहीजनो .......
 कुछ दिन हो गए कुछ लिखे हुए .....
 सो आज ...थोडा सा वक़्त मिला है और एक अच्छा सा विषय भी मिला है तो कुछ लिख लेता हूँ...
क्या है ....यह कुछ ...इस कुछ के पीछे भागते  हुए हम अपना बहुत कुछ खो देते है ...और कुछ न कुछ पा भी ले ते है ........
बोर तो नहीं हो रहे ..? ये क्या लगा रखा है ..कुछ ....
 टाइटल कुछ और है और लिखते कुछ और हो ..
   तो सुनो दोस्तों यह कुछ ही ...हमारी ख्वाहिश है ......
       सोचो ....दुनिया के सारी प्रॉब्लम की जड़ क्या है .....? ये कुछ ही तो है ....
भगवान बुध्ध  ने कहाथा अगर आपके जीवन मै खवाहिश मै कुछ कमी लोगे तो प्रॉब्लम अपने आप ही कम हो जायेंगे .....
             कितनी ख्वाहिश हम रखते है ....सब से .....अगर हम अपनोसे कुछ ख्वाहिश कम  kar ले तो ..?  क्या फर्क पड़ेगा वो आप अपने आपसे ही पूछ लीजिये ......
 .....लेकिन दोस्तों ख्वाहिश  को कम करने के लिए भी एक ख्वाहिश  जरूरी है ......मैंने अपने एक पोस्टिंग मैं लिखाथा......
"आशायाः ये दासाः ते दासाः सर्वलोकस्य ।आशा येषां दासी तेषां दासायते लोकः ॥
 मतलब ....आशा यानि ख्वाहिश के जो दास है यतो गुलाम है वो सब के दास होते है ...मगर आशा मानी..ख्वाहिश जिसके दास होती है ..उसके सभी दास रहते है ........
      माफ़ करना अगर बोर किया है तो .......लेकिन प्रयत्न जरूर करना कुछ ख्वाहिश कम करने की ....सिर्फ .......किसी  और  से ...... 

        क्योकि दोस्तों ..अगर हम अपने आपसे  भी ख्वाहिश कम कर देंगे तो जीने की आश ही खत्म होजाएगी ..........
 दोस्तों  ..ख्वाहिश   रखना सिर्फ अपने आपसे ... ख्वाहिश रखना कुछ  देने की ...
             मत रखना ख्वाहिश किसी और से ..ख्वाहिश मत रखना कुछ लेने की....
  क्योकि.. ख्वाहिश ही है जड़ .. दुखो की ...और ख्वाहिश ही है नीव शुखो की ....
  लास्ट मैं हमारे गुजराती मैं ...कहते है ...પારકી આશ સદા નિરાશ .....
  ............

गिला है हमको वक़्त से,


जो कभी पीछे मुड़ कर नही देखता…



मासूम चाहत थी हमारी अपने सपनो में रंग भरने की,
नादान ख्वाहिश थी अपनी वक़्त को रोक लेने की

वो ख्वाहिश दिल में आज भी

लेती है साँस चुपके से कहीं…………………….

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