good evening .......... .
friends .....after long ...time ...
जन्माष्टमी की लम्बी छुट्टी के बाद आज ब्लॉग पे कुछ लिखने का मौका मिला है तो ...
कुछ न कुछ लिखना चाहते हुए ...कुछ ..लिख रहा हूँ.......क्या लिखू ...ये पता नहीं फिर भी ..किशिने कहा था ..
"लिखो तो कुछ एषा लिखो के कलम रोने पे मजबूर हो जाए"
" हर लाब्फ्ज मैं वो दर्द पैदा करो ...के... आँख रोने पे मजबूर हो जाए .."
इसी बात को लेकर आज ..कुछ न कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूँ...
...........................ये चाहत भी बड़ी अजीब चीज़ है ......क्या ...कब... कहा ,...और कैसे ये कुछ भी ...
सोचे बगैर ही हो जाती है ...और इस नाचीज़ सी चीज़ के बगैर जीने की कोई उम्मीद भी नहीं रहती ....आपको भी ...ये प्रतीत होता होगा ...क्यों गलत लिख रहा हूँ ?....ठीक है ...दिल पे हाथ रख के बोलिए ...क्या ...मेरी बात गलत है ....?अरे यार ...सिर्फ वो वाली चाहत ही चाहत नहीं होती ..
बहुत सी चाहत है इस जीवन मैं ....किसीको ..पैसे कमाने की चाहत ...तो किसीको ..बड़ा आदमी बनने की चाहत ...किसीको .पाने की चाहत ..किसीको खोने की चाहत ...खोने की चाहत तो बहुत ही कम को ही होती है ...लेकिन होती जरूर है ..क्यों की अगर किशी चीज़ से आप ..उब गए है .तो ऐसी भी चाहत कभी हो ही जाती है ...बहुत सी चाहत ............ ...अगर लिखने जाये तो ...वक़्त कम पड . जाये ..इस लिए कुछ चित्र यहाँ पेश किये है हर एक को कुछ न कुछ चाहत है ..क्या है ...?ये आप सोच लीजिये .....

तेरी मोहब्बत में गिरफ्तार हो गया .
न जाने कियों तुम से प्यार हो गया.
कोई है दिल जो धड़कता है मेरे लिए ,
उस धड़कन पे मैं निस्सार हो गया
बस्ती बस्ती खोर उदासी पर्वत पर्वत खली पण , मन हिरा बेमोल लुट गया घीस घिसरी का तन चन्दन ,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गजब की है ,
एक तो तेरा भोला पन है एक मेरा .................
जब से एक लम्हा तेरे साथ जिया है ,
कमी को तेरी हर पल महसूस किया है,
बनी गुनाहगार खुद की नज़रों में ,
उससे पहले तेरा नाम लिया है.
तेरी याद के साए में जीए जा रहे हे ..
कैसे कहे हम हर पल खुद से दूर हुए जा रहे है…
बेरहम वक़्त है साथ नहीं देता है..
और वो है जो हमे भुलाये जा रहे है…”
प्यार में तन्हाई भी ,
रुसवाई भी,
मिलती है जग हसी भी.
उस प्यार में आता है मज़ा ,
जिस में हो जुदैई भी………
प्यारी सी बातें तेरी मज़ा देती हैं .
दूरियन है दरमियाँ सजा देती हैं.
रौशनी बनके आयी तू जिंदगी में इस तरह ,
मस्त अदाएं तेरी वफ़ा देती हैं. ,,,
माना तेरे दिल में बसते हैं
चाहत की चिंगारी कब शोला बन गयी दिलबर ,
तेरे दीदार को हम तरसते हैं. .......येही है सबकी ...चाहते...
लेकिन .... ये चाहत एक ऐसा एहसास है ...अगर पूरी होजये तो भी जीवन को कहासे कहा ले जाती है ....अगर पूरी न हो तो भी .............................?
दोस्तों .....हमारा जीवन ही चाहत की नीव पर ही तो खड़ा है....પરંતુ ...
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.....માનવી ના મનસુબા નો તાગ કદી જડતો નથી ..
કેવી કરામત કુદરત ની ..
એક સરખા માનવી કદી ઘડતો નથી..
તારા વિના નહિ જીવી સકું .. એવું કેહનાર ..
કદી સાથે મારતો નથી.. ...........






















