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शनिवार, 27 अगस्त 2011

चाहत .......

good evening .......... .
                          friends .....after long ...time ...
                  जन्माष्टमी की लम्बी छुट्टी के बाद आज ब्लॉग  पे कुछ लिखने का मौका मिला है तो ...
कुछ न कुछ लिखना चाहते हुए ...कुछ ..लिख रहा हूँ.......क्या लिखू ...ये पता नहीं फिर भी ..किशिने कहा था ..
                          "लिखो तो कुछ एषा लिखो के कलम रोने पे मजबूर हो जाए"
                         " हर लाब्फ्ज मैं वो दर्द पैदा करो ...के... आँख रोने पे मजबूर हो जाए .."
इसी बात को लेकर आज ..कुछ न कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूँ...
  ...........................ये चाहत भी बड़ी अजीब चीज़ है ......क्या ...कब... कहा ,...और कैसे ये कुछ भी ...
सोचे बगैर ही हो जाती है ...और इस नाचीज़ सी चीज़ के बगैर जीने की कोई उम्मीद  भी नहीं रहती ....आपको भी ...ये प्रतीत होता होगा ...क्यों गलत लिख रहा हूँ ?....ठीक  है ...दिल पे हाथ रख के बोलिए ...क्या ...मेरी बात गलत है ....?अरे यार ...सिर्फ वो वाली चाहत ही चाहत नहीं होती ..
बहुत सी चाहत है इस जीवन मैं ....किसीको ..पैसे कमाने की चाहत ...तो किसीको ..बड़ा आदमी बनने की चाहत ...किसीको .पाने की चाहत ..किसीको खोने की चाहत ...खोने की चाहत तो बहुत ही कम को ही होती है ...लेकिन होती जरूर है ..क्यों की अगर किशी चीज़ से आप ..उब गए है .तो ऐसी  भी चाहत कभी हो ही जाती है ...बहुत सी चाहत ............ ...अगर लिखने जाये तो ...वक़्त कम पड . जाये ..इस लिए कुछ चित्र यहाँ पेश किये है हर एक को कुछ न कुछ चाहत है ..क्या है ...?ये आप सोच लीजिये .....









 
तेरी   मोहब्बत   में  गिरफ्तार  हो  गया .


न  जाने  कियों  तुम  से  प्यार  हो गया. 

कोई  है  दिल  जो  धड़कता  है मेरे  लिए ,

उस  धड़कन  पे  मैं  निस्सार  हो गया 
बस्ती  बस्ती  खोर  उदासी  पर्वत  पर्वत खली  पण , मन  हिरा  बेमोल  लुट  गया  घीस  घिसरी  का  तन  चन्दन ,

इस  धरती  से  उस  अम्बर  तक  दो  ही  चीज़  गजब  की  है ,

एक  तो  तेरा  भोला  पन है एक मेरा  .................  
जब  से  एक  लम्हा  तेरे  साथ  जिया  है ,


कमी  को  तेरी  हर  पल  महसूस  किया  है,

बनी  गुनाहगार  खुद  की  नज़रों  में ,

उससे  पहले  तेरा  नाम  लिया  है.
तेरी  याद  के  साए  में  जीए  जा  रहे  हे  ..


कैसे   कहे  हम  हर पल खुद से दूर  हुए  जा रहे है…      

बेरहम  वक़्त  है साथ नहीं  देता   है..  

और  वो  है जो  हमे  भुलाये  जा रहे है…”   
प्यार  में  तन्हाई   भी ,


रुसवाई   भी,

मिलती  है   जग  हसी  भी.

उस  प्यार में आता  है मज़ा ,  

जिस  में हो  जुदैई  भी……… 


प्यारी  सी  बातें  तेरी मज़ा देती  हैं . 


दूरियन  है दरमियाँ  सजा  देती हैं.  

रौशनी  बनके  आयी  तू  जिंदगी  में इस  तरह ,

मस्त   अदाएं  तेरी वफ़ा  देती हैं.   ,,,    

     
           हस्ते   हो तो  हम  हस्ते  हैं                                                    .  

           माना  तेरे  दिल  में बसते  हैं 

           चाहत  की   चिंगारी  कब  शोला  बन  गयी  दिलबर ,

                 तेरे दीदार  को  हम तरसते   हैं.    .......येही है सबकी ...चाहते...


     
लेकिन .... ये चाहत एक ऐसा एहसास है ...अगर पूरी होजये तो भी जीवन को कहासे कहा ले जाती है ....अगर पूरी न हो तो भी .............................?
दोस्तों .....हमारा जीवन ही चाहत की नीव पर ही तो खड़ा है....પરંતુ ...
 .
  .....માનવી   ના  મનસુબા  નો  તાગ  કદી   જડતો  નથી ..



કેવી  કરામત  કુદરત  ની ..


એક  સરખા  માનવી કદી ઘડતો  નથી..  


તારા  વિના  નહિ  જીવી  સકું .. એવું  કેહનાર ..


કદી સાથે  મારતો  નથી..  ...........


बुधवार, 17 अगस्त 2011

हम खुद ही अपने देश को खाने मैं लगे है तो कौन बचा सकता है...

whats happen .......in ........my india ........... !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
............................when our prime minister ....says........ i m not able to .solve ......all the problems ...of ...india ...
 ..i m not magic van .....if ...they say ..why ....why ...&  ...why ....?...............
           क्या आपको नहीं लगता अब समय आगया है ......?
क्या ...आन्दोलन करते हुए अगर जनता ....भड़क गयी तो क्रांति ....की नयी सुरुआत हो सकती है ....?ये अहिंसक आन्दोलन कोई नया मोड़ ले शकता है ...?
               ...............क्या करना hoga  ...इन सब मैं सरकार.....को ...?
क्या हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी को ...अब अपनी कमी ओ को समजते हुए ...अब ...सत्ता से अलग होजाना चाहिए ...???????????/ 
  .........सोचिये ...अगर आज के दिन मैं ....प्रधान मंत्री ...अगर ...निवृत हो जाते है ....
 तो क्या देश एक ...नए मुद्दे की और मुड़ शकता है .......?///
 अगर ...कांग्रेस ..किशी और को ...यातो ... राहुल गाँधी को ...प्रधान मंत्री बनाये ......
तो  एक  साफ  सुथरी सरकार देने का एक  जबरदस्त मौका ...आज मिल रहा है ....क्योकि आज के विरोध के चलते जो भी भ्रष्ट नेता है ..उनको भी सत्ता से अलग रख सकते है .....
और इसी विरोध का जबदस्त फायदा फिरसे कांग्रेस उठा सकती है ....
 मगर इसमें एक सहस करने की कांग्रेस को जरूरियात है ......
...पर इसमें अब के बाद के तिन साल जो बाकि है वो बहुत ही असर करक तरीके से सर्कार चलानी होगी .....
          क्या ऐसा होगा ....?
 क्या ....कांग्रेस ..पार्टी की भी यही राजकीय चाल है ....?राहुल गाँधी को प्रमोट करने की .....?
...............और अंत मैं क्या ...अन्ना हजारे अपने आन्दोलन को सफल बना सकेंगे ..?
अगर ..खुद से सुरु करे तो ...भ्रस्ताचार आज नहीं तो कल जरूर कुछ नकुछ कम होगा ....
और भ्रस्ताचार ...मिटाने के लिए पृकृति मैं ही बदलाव लाना होगा .....
       जब tak हम अपने देश को या तो देश के कानून का इस्तेमाल  अपने ... लाभ के लिए करना band  नहीं करेंगे तब tak चाहे जितने भी आन्दोलन हो ये ......भ्रस्ताचार मिट नहीं सकेगा ....
 क्योकि जब चारो और से हम खुद ही अपने देश को खाने मैं लगे है   तो  कौन बचा सकता है इस देश को ...............................?????????????????????????????????????????????????????
           ....
       
    

रविवार, 14 अगस्त 2011

आभार...........

दोस्तों ..............
           नमस्कार ................
   ऐसे दोस्तों   के बारे मैं लिखना चाहता हूँ .....जो मुझे यहाँ कुछ न कुछ लिखने की प्रेरणा देता रहता है .....क्योकि मुझे पता नहीं वोह मेरी सारी पोस्ट पूरी पढ़ता है या नहीं लेकिन हां वो पसंद जरूर करता है ....और मैं भी उसकी  comment के लिए बेक़रार रहता हूँ....
                                 

..................................................................   वक़्त चलता रहता ही रहता है ...कभी वो रुकता  नहीं .......
.हां जरूर कुछ न कुछ बदलता रहता है वक़्त के साथ ....!.. .....और उसी बदलते वक़्त के साथ मैं भी कभी अपने पोस्ट मैं बदलाव लाने की कोशिश करता रहता हूँ...कुछ  अलग कुछ ज्यादा intresting ..
जिससे ...मुझे और आपको भी... जोभी पोस्ट पढ़ रहा हो ...उसको भी ,,,पसंद आये ... क्योकि....
... जब भी आपकी किशी भी बात को कोई अगर थोडासा भी पसंद करले तो आप को बड़ा अच्छा लगता ...है ..और आप ...कही न कही उसकी और कुछ ज्यादा ही खीचते चले जाते है ...इसमें आपकी मर्जी या तो न मर्जी कभी भी नहीं चलती .....चाहे आप उसे जानते हो या नहीं ...
वो कौन है कहासे है ...कैसा है ...ये सब जानने की आप को जरूरत नहीं रहती ..... और यही तो है फिल्लिंग्स... यानि ...एहसास.. .....जो कब ..क्यों और कैसे ....किसके प्रति बढ़ जाती है ..वो पता ही नहीं चलता  ...उस फीलिंग्स को आप कोई भी नाम दे सकते हो ...
                        ,,,,,,,,, हम जानते है की इन्सान के जीवन मैं कुछ करने लिए किसीका साथ होना बहुत जरूरी है .... और वोह साथी  जरूरी नहीं .के आप के करीब हो ...और वह भी जरूरी नहीं की उसे आप जानते हो ...लेकिन हां यह जरूरी है के उसे आप दिल से अपना साथी मानते हो ....,.....
...................और ऐसे ही सभी साथी यो का आभार व्यक्त करते हुए ये पोस्ट आप सभी ...दोस्तों के नाम करने की कोशिश ..कर रहा हूँ ...पसंद आये तो पढ़ते रहना ...अगर कुछ ..अच्छा न लगे तो माफ़ करना ....
 .................क्योकि दोस्तों ,,,मैंने अपनी एक पोस्ट मैं लिखाथा....
कुछ रिश्ते उपरवाला बनता है.


कुछ रिश्ते लोगबनाते है...

पर वो लोग बहुत खास होते है .

जो बिना रिश्ते के कोई रिश्ता निभाते है....
                                 

sisters day

indian culture ......whats .....?
                 friends ..i want to tell some thing about our ....real culture ....... ...
            first ... i tell  about ...... our festiwals ......
                   why first about festiwals .....?
 bcuz ...... yesterday our most important festiwal .... "raxa bandhan "....means "sisters day" ......
 in all culture ... we saw ... velentine day ... friendsheep day ... &all type of others day will celebrate ..by people ... but no one celebrate ..sisters day ..without in india or  without indian culture .....
 but this the more important for ... fillings bitween brothers & sisters ....we all celebrate this ...festiwal from heart .... not from ...mind ... & this is the real culture of india .. if ..like us ....
        after all ... if we know .. about our fillings ... we surelly joint with our ...family .... & also .. we r .very senetive with our ..family ...  in all ..good or worst .. statics ... means ...... we all r joint with ....each other.. by heart ..not only from mind ..... ... & this is our culture ........ ..... in ...short .....

शनिवार, 13 अगस्त 2011

वक़्त कभी भी करवट बदल देता है

हम  छोड़ चले इस महेफिल को याद आये कभी तो मत रोना ......
         कभी  कभी ...एसा भी ..सोचने के लिए इन्सान मजबूर होजाता है ....क्यों ...?????????????
 क्योकि .........वक़्त कभी भी करवट बदल देता है .....और वैसे भी इन्सान चाहे जोभी हो वोह अपनी ...संवेदना मै कही न कही तो ज़ज्बाती होजाता है ....कभी इशी एक सब्द के कारन उसके दिल को इतनी गहेरी चोट पहोचति है की वह चोट चाहे कितने ही मरहम लगाओ ...रूज़ नहीं पाती ....
और वोह अपने पुरे जीवन को ही छोड़ देने पर मजबूर हो जाता है ....कभी आपने सोचा है .....किसी .ऐसे इन्सान के बारे मैं.................. ..?.वैसे तो एसा वक़्त कभी न कभी सब के जीवन मैं आही जाता है .... और ..कोई मजबूती से इसका मुकाबला करके ,,,अपनी नैया को पार लगा देता है ...अन्यथा ..बिच भंवर मैं ही मायुश होकर डूब जाता है ....
 .............. डुबते  हुए को तिनके का सहारा काफी है ..... अगर ऐसे ही वक़्त मैं आपको कोई सहारा मिलजाए केवल ...तिनके जितना भी... तो शायद .....वक़्त फिर से करवट बदल लेता है ..आपभी सोच रहे होंगे क्या..... आज ऐसी नकारत्मक बात करने लगे हो ......लेकिन आज ..मैंने..सुबह  के अखबार मैं अचानक पढ़ा किसी इन्सान ने जहर पीकर अपने जीवन को समाप्त कर लिया ...तो मै उसके यानि ऐसे ..आत्म हत्या करने वालो के बारे मैं सोचने लगा ...क्यों एसा करते होंगे लोग ....?
सोच ही सोच मैं मैं भी उनकी व्यथा के बारे मैं ...लिखने  पर मजबूर हो गया .......
मगर  दोस्तों ...कितने भी gam हो जीवन मै ..harne से वो kam नहीं hote ..
datkar  मुकाबला कर लो ...शायद वो gam कभी gam  ही  नहीं hote ....

.............दो  दिन  की  ज़िन्दगी  है  उसे  हंस  के   गुज़रो ,

            . इन   कीमती  लम्हों  को  गंवाना  नहीं  अच्छा.....
........मायुश.............. हम भी है...... मायुश................. तुम भी हो ...
....आओ ..इस मायूशी को दो कदम साथ चलके ख़ुशीयो मैं बदल देते है ....
..एक लम्हा ही काफी है ....इस कमबख्त  मायूसी को खत्म करने के लिए ....
 .........................अगर किशी एक को भी इससे ...नयी राह मिलजाए .... जीने की ...तो काफी है ...


हमारी जिंदगी के लिए ....

बुधवार, 10 अगस्त 2011

सावन का महिना

मौसम .....
                     कितना खुबसूरत है ....सावन का महिना ....मौसमे इश्क का महिना कहा जाता है ...तन और मन दोनों को प्रफ्फुलित करने वाला ये महिना .....है ....सही मैं ...मौसम का असर हमारे तन और मन पर कुछ ज्यादा ही पड़ता है.....कितने सारे नग्मे कितनी सारी कविताए कितने सारे ...सर्जन हमारे सर्जको ने किये है .....क्यों सिर्फ सावन के महीने के बारे मैं ...? क्योकि सावन होता ही कुछ अलग ..कोई कहता है मौसम बेईमान है ...कोई कहेगा ..मौसम आशिकाना है ....लेकिन सही मैं ये मौसम बहुत खुबसूरत होता है....और इसके बारे मैं ..जितना भी लिखा जाये उतना कम पड़ शकता है ,,,और वैसा ही मौसम आज यहाँ ...है .... इस लिए  मुझे भी कुछ न कुछ लिखने का दिल कर रहा है ....
       रिम जिम रिम जिम ..बारिस हो रही है ... और मिटटी की खुसबू पुरे तन और मन को मदहोश कर रही है ... एक अजीब सा नशा ....छाया है ... ...दिलो दिमाग पे ....चारो तरफ हरी हरी सी पत्तीया .... मुस्करा कर ...कह रही है ...पेड़ हस्ते हुए ...खिल रहे है ....जाने ... के वह भी आज ...कुछ अलग ही रंग मैं रंग कर अपनी ख़ुशी को .ज़ाहिर कर रहे है ......
       और वहासे जब धरती की और देखते है तो वह भी ...एक भिनिसी खुसबू के साथ जाने हरे रंग की चुनरी ओढ़ के अपने तन पर ...खुसबू ..लगाके नै दुल्हन की तरह सज़ रही हो ..एसा ही लगता है ...मंद मंद ठंडी मरुत . ... जैसे उसकी झुल्फो को सहला रहा हो ...ऐसे ही ..मदहोश मौसम ...आज ..सब को मद होश कर रहा है ....
 इसी ही मदहोशी मैं  ..कुछ नग्मे जो ..इसी मौसम मैं सुनना बहुत अच्छा लगता है ...वही पोस्ट कर रहा हूँ ...

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

वो ख्वाहिश दिल में आज भी....

नमस्कार ...........
                     स्नेहीजनो .......
 कुछ दिन हो गए कुछ लिखे हुए .....
 सो आज ...थोडा सा वक़्त मिला है और एक अच्छा सा विषय भी मिला है तो कुछ लिख लेता हूँ...
क्या है ....यह कुछ ...इस कुछ के पीछे भागते  हुए हम अपना बहुत कुछ खो देते है ...और कुछ न कुछ पा भी ले ते है ........
बोर तो नहीं हो रहे ..? ये क्या लगा रखा है ..कुछ ....
 टाइटल कुछ और है और लिखते कुछ और हो ..
   तो सुनो दोस्तों यह कुछ ही ...हमारी ख्वाहिश है ......
       सोचो ....दुनिया के सारी प्रॉब्लम की जड़ क्या है .....? ये कुछ ही तो है ....
भगवान बुध्ध  ने कहाथा अगर आपके जीवन मै खवाहिश मै कुछ कमी लोगे तो प्रॉब्लम अपने आप ही कम हो जायेंगे .....
             कितनी ख्वाहिश हम रखते है ....सब से .....अगर हम अपनोसे कुछ ख्वाहिश कम  kar ले तो ..?  क्या फर्क पड़ेगा वो आप अपने आपसे ही पूछ लीजिये ......
 .....लेकिन दोस्तों ख्वाहिश  को कम करने के लिए भी एक ख्वाहिश  जरूरी है ......मैंने अपने एक पोस्टिंग मैं लिखाथा......
"आशायाः ये दासाः ते दासाः सर्वलोकस्य ।आशा येषां दासी तेषां दासायते लोकः ॥
 मतलब ....आशा यानि ख्वाहिश के जो दास है यतो गुलाम है वो सब के दास होते है ...मगर आशा मानी..ख्वाहिश जिसके दास होती है ..उसके सभी दास रहते है ........
      माफ़ करना अगर बोर किया है तो .......लेकिन प्रयत्न जरूर करना कुछ ख्वाहिश कम करने की ....सिर्फ .......किसी  और  से ...... 

        क्योकि दोस्तों ..अगर हम अपने आपसे  भी ख्वाहिश कम कर देंगे तो जीने की आश ही खत्म होजाएगी ..........
 दोस्तों  ..ख्वाहिश   रखना सिर्फ अपने आपसे ... ख्वाहिश रखना कुछ  देने की ...
             मत रखना ख्वाहिश किसी और से ..ख्वाहिश मत रखना कुछ लेने की....
  क्योकि.. ख्वाहिश ही है जड़ .. दुखो की ...और ख्वाहिश ही है नीव शुखो की ....
  लास्ट मैं हमारे गुजराती मैं ...कहते है ...પારકી આશ સદા નિરાશ .....
  ............

गिला है हमको वक़्त से,


जो कभी पीछे मुड़ कर नही देखता…



मासूम चाहत थी हमारी अपने सपनो में रंग भरने की,
नादान ख्वाहिश थी अपनी वक़्त को रोक लेने की

वो ख्वाहिश दिल में आज भी

लेती है साँस चुपके से कहीं…………………….

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

दोस्ती को बोज़ ..यानि ...भार...LOAD बना देते है

GOOD EVE NING ...MY..... & ...ONLY MINE ....
 OH! SORRY ......NO... ONE ...IS ...ONLY ........
             कोई बात नहीं दोस्तों वैसे भी हम जानते ही है .... कोई भी इस दुनिया में किसी एक का ही ......................दोस्त नहीं  ..होता ...और ऐसी उम्मीद भी नहीं रखनी चाहिए ... क्योकि हर एक इन्सान की कीसिना किसीसे अलग ..अलग तरह की दोस्ती होती  रहती है ... और इसी दोस्ती को लोग क्या क्या नाम दे देते है ....और ज्यादातर लोग दोस्ती और RELATION मैं ....अपना प्रभुत्व ज़माने लगते .है .... और दोस्ती को बोज़ ..यानि ...भार...LOAD बना  देते   है  ...
         इन सब मैं ज्यादातर इन्सान की मनोस्थिति प्रगट हो जाती है .......
   ये मैं किशी एक के बारे मैं नहीं कह रहा हूँ ... लेकिन सोचना दोस्तों ....ज्यादातर ...यही होता है .....एक बार कोई हमारे थोडा सा भी करीब आजाता है ...तो हम उस पर अपना हक ज़माने लगते है ...क्यों की हमारे अन्दर भी एक डर सा लगा रहता है ...की कही वो हमसे दूर न होजाए ....उसी हक या तो डर के कारण कई बार हम अपने रिश्ते यातो दोस्ती मैं बहुत दूर होजाते है ....
      इस लिए ..हमेशा ..दोस्ती और रिश्ते मैं कभी भी ....अपने स्वामित्व यातो हक नहीं जाताना चाहिए .....क्योकि दोस्ती और रिश्ते प्रेम की बुनियाद पर खड़े होते है और ..  .प्रेम .......के बारे मैं मेरे एक दोस्त ने लिखा था ....
........
प्रेम मौन है ..


अगर हल्ला हो तो वो प्रेम नही,

शायद है दिखावा..

प्रेम लेना नही ..

प्रेम देना है..

अगर उसमे उम्मीद कि,

तो ज्यादा टिकता नहीं ...

प्रेम में भूल जाना है दुनिया को..

बस सिर्फ प्रेम करना है एक दूजे को..

गलती देखनी नहीं है दूजे की..

ये प्रेम नहीं है

परगलतिया दिखती ही नहीं दूजे कि,

इसे ही सच्चा प्रेम कहेते है ....और इसे ही सच्ची दोस्ती भी कहते है ...

बुधवार, 3 अगस्त 2011

old is gold ......

नमस्कार ...




.........प्यारे ...दोस्तों ....



संगीत ....और ...मधुर संगीत ..... फर्क है न इन दोनों चीजों मैं ....



मधुर संगीत जो हमारे कानो से लेकर हमारे दिलो दिमाग पे छा जाता है ......



अरे ! कभी कभी तो हम उसमे इतना डूब जाते है की हमें समय, स्थान या तो संजोग का ..ख्याल ही नहीं रहता ....क्योकि ....संगीत चीज़ ही ऐसी है ....आज मै कुछ ..नगमे जो मुजे बहुत पसंद है वो पोस्ट कर रहा हूँ... अगर आपको पसंद आये ......तो ...और कुछ नहीं,,,,,,,, सुन लीजिये .....


अच्छा आज बस इतने ही .....

सोमवार, 1 अगस्त 2011

सोचाथा ...दुनिया मै अकेले आये हे अकेले ही चले जायेंगे

नमस्कार ..मित्रो ...
आज मन करता है ..कुछ अलग लिखते है ....प्रयास किया है ..

सोचाथा ..
.दुनिया मै अकेले आये हे अकेले ही जाना था...
राह चलते ...हुए देखा यहाँ  राह ढूंढने वाले गुमराह भी मिल जायेंगे ... 
जीवन के सफ़र मैं हमने एक हमराही माँगा था
क्या पता था ...इस राह मैं राही बहुत  ... मिल जायेंगे......
काटे बहुत  थे राह मैं....राहें टेढ़ी थी पथरीले थे रास्ते ..
मगर पथ मैं साथ देने कोई   ..हमराह भी मिल जायेंगे.. 
मंजिल दूर सही....  राह मुस्किल सही .....
अब कोई गम नहीं ..साथी ही अगर हमराह है तो ..
अँधेरे मैं भी कही न कही चिराग  मिल ही जायेंगे  .....
अभी सफ़र पूरा नहीं हुआ मगर .....,,,,,दोस्तों..आपके साथ से ..
 जाने से पहले दुनिया मैं कुछ न कुछ अच्छा काम कर   जायेंगे ..............
..................................अच्छा अभी चलते है .....मिलने की उम्मीद के साथ ....????
 .........................??????...........................................???????....................?????/...........
...........................................??????..........??????..........????????.........??????????.....