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रविवार, 18 दिसंबर 2011

क्या ..... हम अपने जीवन से या तो अपने काम से संतुष्ट है ...?

क्या ...? क्यों.. ? किस लिए ..? कैसे ..? कब ...? कहा ...?  किसने ..?  कितने...  ?   किसे ...? कौन ...?कौनसे ..?
                  ऐसे कई सवाल हम जीवन भर अपने आपसे करते रहते है ...और हमारा पूरा जीवन करीबन इन सवालो के घेरे मैं ही ख़तम हो जाता है ...कभी किसी सवाल का उत्तर मिल जाता है तो कभी सवाल के सामने दूसरा ही सवाल उत्तर मैं ही मिल जाता है ...फिरभी हम सवालो से सवाल करते हुए ...बस जवाब की राह मैं ..संघर्ष ..करते ही जाते है ...और यह सवाल -जवाब का सिलसिला ही जीवन का अंतरिम आनंद है ...वर्ना क्या है ये जीवन का रहस्य ...?
                       और ऐसे ही एक सवाल पर आज एक इंटरेस्टिंग पोस्ट लिखना चाहता हूँ...
   क्या    ..... हम  अपने जीवन से या तो अपने काम से संतुष्ट है ...?
     अगर है ...?   तो आप महान है .......                             ..? अगर नहीं ..तो किसलिए ...?
           हैना... दोस्तों  ..सवाल के जवाब मैं  सवाल ....
   फिर भी सोचने और अमल मैं लाने के लिए बहुत ही अच्छा सवाल है ....
 अगर विवरण के साथ केवल एक यही सवाल का उत्तर ..हम ढूंढने जायेंगे तो कही न कंही हम . विचलित हो जायेंगे ....क्योकि ...? हम सोच ही नहीं सकते या तो फिर ..हम अपनी सोच को स्थिर नहीं रख सकते इस सवाल के उत्तर ..मैं ......मगर क्यों ..?
    क्योकि हम खुद ... अपने जीवन से एक ऐसी आँख मिचौली खेलते रहते है ...और... हमें पता ही नहीं चलता ..की... कब हम इन सारे सवालो के घेरे मैं आजाते है ..?
   फिर भी......हम जरूर ये चाहते है ..की ..हम भी कोई तो ऐसा काम करे जिससे ..हम भी अपने काम की वज़ह से जीवन की संतुस्ठी का कम   से कम एक अनुभव तो कर सके ...
                       तो फिर ऐसा क्या काम है ..जिसकी वज़ह से हम अपने जीवन मैं संतुष्ठी का अनुभव कर सकते है ..? यातो जीवन का सही मायने मैं आनंद उठा सकते है ...!
            तो वोह है ..किसी अंजान चेहरे की हंसी .... यातो फिर हमारे अपनों की ख़ुशी ...सबसे बड़ी ख़ुशी या तो संतुष्ठी किसी जरूरियात मंद को  दी  हुई ख़ुशी ..भले ही वो उसको कुछ भी बिना दिए ..
सिर्फ एक मुस्कराहट यातो कुछ अच्छे सब्द जोउसकी तकलीफ मैं कमी ला सके  ...दे शकते है क्या ...?
          जरूर दे शकते है ...
                 जब  हम अपनी ही उल्ज़नो मैं किसी और के सहारे की अपेक्षा रखते है ..तो क्या हम भी किसी का सहारा नहीं बन सकते .....और ये सहारा ही है .वो काम जो हमें
अपने काम की वज़ह से जीवन का संतोष देता है ..
   आज के लिए इतना ही ..बहुत ही सरल भाषा मैं और मेरी  अपनी सोच को रख रहा हूँ .
और  ये कुछ पंक्ति या एक दोस्त ने अपने पोस्टिंग मैं लिखी थी वही पेश कर रहा हूँ... .


        जीवन एक संघर्ष है ,

संघर्ष में जीना ही , हम ने फूलों से सिखा है ,

काँटों के माझ , पलकर भी ,

खिलखिलाकर हसंना ही , हम ने फूलों से सिखा है ,

ख़ुद डाली से टूटकर भी,

दूसरो को आपस में मिलाया है ,

प्यार के रूप में तुम्हें ,
लोगों ने हमेशा अपनाया है ,

कभी पैरों तल्ले कुचल कर ,

कभी लाशों पर बिखर कर ,

कभी पड़े रहते हो ,

भगवान के चरण -कमल पर ,

कभी तो लटकते, मानव के गले पर ,

कभी न कम , न होगी तुम्हारी शान ,

सजेगें हमेशा ,तुम्हीं से जग का फूलदान ,

हम ने हमेशा फूलों से सिखा है ,

 

 

मुस्कराना... मुस्कराना.. और बस मुस्कराहट  देकर  मुस्कराना ..

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