कोई बात नहीं सरकार को अगर लोकपाल नहीं लाना ....
तो कोई ऐसा सिस्टम जिससे पैसो का जो भी व्यवहार हो वो पारदर्शी हो ..
और वोभी केवल सरकार यतो सरकारी नौकरों के लिए नहीं परन्तु ..पुरे भारतीयों के लिए जिसमे आम जनता ..से लेकर उद्योगपति तक ..... चपरासी से लेकर प्रधान मंत्री तक सब आजाये ...ऐसा कोई सिस्टम तो बन सकता है ...न .
और वैसे भी ये सब झटिल कानून जिसमे सबको परेशानी उठानी पड़ेगी ..इससे तो अच्छी कोई सरल सिस्टम ही ले आओ ...
एक सरल और तुरंत असरदार ...फ़ॉर्मूला ...
१. सबसे पहले ..५००० रुपये से ज्यादा का कोई भी व्यवहार केवल बैंक के ज़रिये ही हो ...और इसे अमल करने के लिए सख्त कानून हो ..
२. किसीभी भारतीय नागरिक के पास ५००० रुपये से ज्यादा नकदी मिल जाये तो उसे तुरंत जप्त किया जाये ..और उसपे कानूनी कार्यवाही हो ..
३. बैंक से किये गए किसी भी व्यवहार का पूरा विवरण चेक मैं लिखा हो ...
४ .आज तक का जोभी कला धन यतो बिन हिसाबी सम्पति जिसके भी पास हो उसे ..२० यतो २५ % टैक्स लगाके जयाज करार कर दिया जाये ...और उसके लिए एक समय मर्यादा दी जाये ..चार या पाँच महीने की ..उसके बाद ...उन पर भी सख्त कार्य वाही हो .
५. भारत के सभी नागरिक को अपनी पूरी सम्पति जाहिर करने का भी कानून हो ..और अगर सम्पति जाहिर करने के बाद भी यतो गलत ब्यौरा देने पर उसकी सभी सम्पति को जप्त करने का कानून हो .
इससे केवल भ्रस्ताचार ही नहीं मगर कई ऐसे दर्द जो हम सालो से भुगत रहे है ...उसमे भी बड़ी कमी आजायेगी ...
जैसे की ..अपहरण ...कोईभी आदमी अगर पैसो के लिए किसी का अपहरण करेगा ...तो उसे फिरौती की रकम नक़द ही लेनी पड़ती है मगर ये कानून होनेसे ...चेक से तो वो पैसा ले ही नहीं पायेगा ...तो कमी आएगी न ..
जैसे कोई ...चोरी करेगा यतो लूट करेगा तो भी चेक से तो वो लूट नहीं कर पायेगा ...
बहुत ही सरल उपाय है अगर इसमे .कुछ संसोधन करके कोई बुध्धिमान अर्थ शास्त्री के साथ विचार विमर्श करके ...इसे अमल मैं रखा जाये तो .... ..
क्या हो सकता है ऐसा ..?

सारे बिंदु विचारणीय ....
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