नमस्कार दोस्तों ....
कब लिखना सुरु किया ..पता ही नहीं चला ७२ पोस्टिंग हो गयी ...बड़ा ही आनंद मिलता है ..
यह देख कर ....क्योकि हम कोई लेखक तो है नहीं फिर भी जो भी मन मैं आया वही सब कुछ लिखते रहे ...फिर भी मन ही मन तो मान लिया की अगर विचारो को पन्ने पर उतारने की अगर कोशिश की जाये तो .. ......
और वही कोशिश ने आज एक आत्म विश्वाश पैदा कर दिया ...लिखने का ...और इसके लिए सबसे ज्यादा आभार गूगल का मानना पड़ेगा क्योकि वही तो है ....जिसके कारन ...हमारे विचारो को हम प्रगट कर शकते है ......
मगर अब सरकार इन सोसियल नेटवर्क पर भी पाबंधी लाना चाहती है ....क्या तकलीफ है उनको ...आप जानते हो ...? वो कहते है ..की सोसियल नेटवर्क के द्वारा पब्लिक
अपने सही और गलत दोनों विषयो पर टिपण्णी करते है ...किसी खास नेता के ऊपर भी टिप्पणिया करते है ...धार्मिक भावनाओ के ऊपर टिप्पणिया करते है ... सही बात है ...अभद्र भाषा के साथ टिप्पणिया करना गलत बात है ,,,मगर इसके लिए भी ...इन नेटवर्क मैं भी ऐसे पोस्टिंग का रिपोर्ट करने की सुविधा भी रखी गयी है ...तो क्या ...
इन नेटवर्क पर पाबंधी लाना सही है ...?आज तो किसी भी आन्दोलन का ज्यादा से ज्यादा प्रभाव लाने मैं भी सोसिअल नेटवर्क का बड़ा योगदान रहता है ,,,,तो क्या इसी कारण वश तो ....ये सब नहीं हो रहा ....?चलो कोई बात नहीं जो करने की जरूरत है वोतो ये लोग कर नहीं पा रहे ...इस लिए वो नए ही विवादित मुद्दों से हमें भटकाने की कोशिश मैं लगे रहते है ...
अब आजाते है आज के विषय पर ,,,,किस्मत ..जिसके बारे मैं आज लिखना सुरु किया था मगर कब विषय को छोड़ किसी और विषय मैं लिख गया पता ही नहीं चला सो माफ़ करना ...
क्या आप किस्मत ....यानि नसीब ...पर यकीन करते है ,,,?
ज्यादा से ज्यादा लोग ...कुछ कुछ वज़ह से ..जरूर करते है ,,,
हां मैं भी करता हूँ.... और क्यों न करू ,,हमारे सारे कार्य जिसमे हम विफल रहते है तो
यही किस्मत तो एक सब्द है जिसे हम दोष दे सकते है ....हां मगर जब सफल हो गए तो ...? यश तो हम अपनी महेनत को ही दे देते है ....ज्यादातर ऐसा ही होता है ...हैना...!
मैंने किशी बुक मैं पढ़ा था की ...जन्म -मृत्यु ...लाभ -हानि ..यश -अपयश ..ये सारी बाते
ऊपर वाले ने अपने हाथ मैं रखी हुई है ...और इन सारी बातो को जो कंट्रोल होता है वही तो है किस्मत ...और हमारा जीवन भी इन ६ बातो मैं ही ..पूरा हो जाता है इसलिए अगर कहा जाये जीने की जो जद्दो जहज है वो भी ....जन्म -मृत्यु ...लाभ -हानि ..यश -अपयश तो यही है ....और यही किस्मत के ऊपर मुजे एक कहानी जो मैंने ..सुनी थी ..
लाला लाहोरी राम एक छोटे से गाँव के बड़े शेठ थे ...रोज उनके यहाँ दो भिखारी ...
भीख मागने के लिए आते थे ...लाला जी रोज ...उनको कुछ न कुछ दे देते थे ...ये उनका रोज का क्रम हो गयाथा ...मगर उनमे से एक भिखारी रोज लाला के कुछ देते ही लाला की तारीफ करता था ,और दूसरा किस्मत की ...रोज ...यही होता था ...
एक दिन की बात है ...लाला को एक व्यापर मैं बड़ा ही फायदा मिला ..उनकी उम्मीद से भी ज्यादा ...मुनाफा इसी व्यापर मैं उन्होंने पाया ...तो लाला ने मान ही मान सोचा की जो भिखारी रोज मेरी तारीफ करता है उसे आज मैं इतनी सोना महोर दे दू के उसका दरिद्र दूर होजाये... यही सोच के लाला ने एक बड़ा सा पपीता मंगवाया ...और उसी पपीते मैं उन्होंने १०० से ज्यादा सोनामहोरे भर दी ...
सुभाह जब दोनों भिखारी आये तो लालाने जो उनकी तारीफ करता था उस भिखारी
को सोना महोरो से भरा हुआ पपीता दिया और दुसरे भिखारी को १ रूपया दिया ...
वो दोनों बिना कुछ बोले वहासे चले गए ...मगर बहार जाकर एक भिखारी जिसके पास पपीता था उसने दुसरे से उसी पपीते का एक रुपये मैं सौदा कर लिया ..क्योकि उसे तो पता ही नहीं रहा की पपीते मैं सोना माहोरे थी ...
तो यही खेल है किस्मत का .....दोस्तों ...
बहुत कुछ है लिखने के लिए मगर फिर कभी ............

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