नमस्कार मित्रो.............
सुभ संध्या .....
कई दिनों के बाद आज ब्लोग अपडेट करने की तैयारी कर रहा हूँ ... अभी कुछ दिमाग मैं आया नहीं है मगर ..विश्वाश है की जो भी आएगा वो बहुत ही खुबसूरत और पसंदीदा होगा ...
कोई भी विषय को सोचे बगैर लिखने में कुछ दिक्कत रहती है ....फिर भी जो भी मन मैं आये और त्वरित सोच को ही लिखने का मज़ा ही कुछ और होता है ....
मज़ा ....यानि आनंद ...ये आनंद भी बहुत ही खुबसूरत सा अहसास है ...लोग चाहे तो कहीसे भी बिना कोई मोल दिए उसे प्राप्त कर सकते है ...क्योकि चाहत और आनंद ...ख़ुशी ..का बड़ा ही गहरा रिश्ता है ...क्योकि बिना चाहत के तो कुछ भी नहीं मिलता....... फिर दुनिया की ये सबसे अनमोल फिल्लिंग्स कैसे मिल सकती है ...चाहत ये भी बड़ा ही खुबसूरत सब्द है ....सब्द को सुनते ही कितनी चाहते ..दिल और दिमाग मैं छा जाती है ...और यही चाहते .कही न कही से हमें ख़ुशी यानि आनंद प्रदान कर देती है .. क्यों .... है न बड़ा ही अजीबसा रिश्ता चाहत और आनंद के बिच मैं .... ?
दोस्तों ...चाहत तो बहुत सी होती है ...और उसका जितना गहरा रिश्ता ख़ुशी के साथ है उतना ही गहरा रिश्ता गम के साथ भी है ....अगर ..दिल मैं चाहत हो हौसला बुलंद हो और फिर भी जिस बात की चाहत हो अगर वो पूरी न हो तो ....? कही न कही वो ही चाहत जो हमें ख़ुशी दे रही थी ...वही कभी कभी गम भी दे जाती है ....क्यों कुछ गलत कहा ...? हैना बड़ा ही गमगीन रिश्ता चाहत और गम के बिच मैं .....?
तो स्नेही जानो अगर ये एक ही बात ..चाहत ...हमें जीवन की सबसे अनमोल ख़ुशी यतो ...न चाह कर भी गम दे शक्ति है तो क्या हम इस चाहत को ही ज़िन्दगी नहीं कह सकते ...?
जिंदगी क्या है ....?
..कभी ख़ुशी है तो... कभी गम है .......जिंदगी
मगर .......
चाहत ही देती है ख़ुशी .चाहत ही देती है गम
...तो क्या चाहत ही है जिंदगी का दूसरा नाम ...?
सुभ संध्या .....
कई दिनों के बाद आज ब्लोग अपडेट करने की तैयारी कर रहा हूँ ... अभी कुछ दिमाग मैं आया नहीं है मगर ..विश्वाश है की जो भी आएगा वो बहुत ही खुबसूरत और पसंदीदा होगा ...
कोई भी विषय को सोचे बगैर लिखने में कुछ दिक्कत रहती है ....फिर भी जो भी मन मैं आये और त्वरित सोच को ही लिखने का मज़ा ही कुछ और होता है ....
मज़ा ....यानि आनंद ...ये आनंद भी बहुत ही खुबसूरत सा अहसास है ...लोग चाहे तो कहीसे भी बिना कोई मोल दिए उसे प्राप्त कर सकते है ...क्योकि चाहत और आनंद ...ख़ुशी ..का बड़ा ही गहरा रिश्ता है ...क्योकि बिना चाहत के तो कुछ भी नहीं मिलता....... फिर दुनिया की ये सबसे अनमोल फिल्लिंग्स कैसे मिल सकती है ...चाहत ये भी बड़ा ही खुबसूरत सब्द है ....सब्द को सुनते ही कितनी चाहते ..दिल और दिमाग मैं छा जाती है ...और यही चाहते .कही न कही से हमें ख़ुशी यानि आनंद प्रदान कर देती है .. क्यों .... है न बड़ा ही अजीबसा रिश्ता चाहत और आनंद के बिच मैं .... ?
दोस्तों ...चाहत तो बहुत सी होती है ...और उसका जितना गहरा रिश्ता ख़ुशी के साथ है उतना ही गहरा रिश्ता गम के साथ भी है ....अगर ..दिल मैं चाहत हो हौसला बुलंद हो और फिर भी जिस बात की चाहत हो अगर वो पूरी न हो तो ....? कही न कही वो ही चाहत जो हमें ख़ुशी दे रही थी ...वही कभी कभी गम भी दे जाती है ....क्यों कुछ गलत कहा ...? हैना बड़ा ही गमगीन रिश्ता चाहत और गम के बिच मैं .....?
तो स्नेही जानो अगर ये एक ही बात ..चाहत ...हमें जीवन की सबसे अनमोल ख़ुशी यतो ...न चाह कर भी गम दे शक्ति है तो क्या हम इस चाहत को ही ज़िन्दगी नहीं कह सकते ...?
जिंदगी क्या है ....?
..कभी ख़ुशी है तो... कभी गम है .......जिंदगी
मगर .......
चाहत ही देती है ख़ुशी .चाहत ही देती है गम
...तो क्या चाहत ही है जिंदगी का दूसरा नाम ...?

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