नमस्कार ...........
...स्नेहीजनो .....
कल की बात को आगे बढ़ाते है .... आपको आज मैंने स्नेही जन बताया क्या हुआ ....
आपसे एक रिश्ता कायम किया है ... बस रिश्ता बनाने के लिए इतनी ही दूरी है ...
आपका और हमारा रिश्ता क्या है ... कोई कहेगा कुछ भी नहीं ....
लेकिन मै कहूँगा बहुत कुछ है ..... 'रिश्ते बनाये नहीं जाते वो तो आप ही बन जाते है..लेकिन ... उसकी डोर बहुत नाजुक होती है ...कब टूट जाये ... ये पता ही नहीं चलता ......
......... दोस्तों ... अज सबसे पहले हम हमारी फॅमिली relation के बारे मैं बात करते है ...
सबसे बड़ा रिश्ता हमारा माता के साथ होता है ... कितना सुन्दर सब्द है ....."माँ"जितना सुन्दर सब्द है उतना ही गहरा और प्यारा सा रिश्ता है माँ और बच्चे का ....
क्योकि ..वोह रिश्ता कभी कोई बना नहीं सकता .. वो अपने नसीब से ही मिलजाते है ...
जो रिश्ता हम बनाते नहीं ... उसे पुरुषार्थ नहीं प्रारब्ध कहते है ....
माता और संतान के रिश्ते मैं कुदरती और मानवीय दोनों काम करते है ....
माँ के ह्रदय मैं कुदरत ने प्रचंड मोह का भंडार रख दिया है ...माँ अपना पूरा प्रेम का खजाना अपने संतान के लिए न्योछावर कर देती है ...
माँ के बारेमें बहुत लिखा गया है .... इसलिए .. ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं है
मैंने कही एक गीत सुना था माँ के बारे मैं बहुत कुछ कह जाता है ....अगर आपको पसंद आये तो ...आप
भी ............................माँ को दुनिया मै सबसे अव्वल दर्जा दिया गया है .....
...
अज इतना ..... ही ............लास्ट मैं ..
".माँ की एक दुआ जिंदगी बना देंगी .
खुद रोयेंगी मगर आपको हंसी देंगी .
कभी भूलकर भी माँ को न रुलाना .
एक छोटी सी ”बददुआ ” पूरा अर्श हिला देंगी "
मैंने कही एक गीत सुना था माँ के बारे मैं बहुत कुछ कह जाता है ....अगर आपको पसंद आये तो ...आप
भी ............................माँ को दुनिया मै सबसे अव्वल दर्जा दिया गया है .....
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अज इतना ..... ही ............लास्ट मैं ..
".माँ की एक दुआ जिंदगी बना देंगी .
खुद रोयेंगी मगर आपको हंसी देंगी .
कभी भूलकर भी माँ को न रुलाना .
एक छोटी सी ”बददुआ ” पूरा अर्श हिला देंगी "
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