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गुरुवार, 21 जुलाई 2011

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नमस्कार मित्रो ......
 ...........................आज मैंने .कही से पढ़ा हुआ एक कोलम यहाँ ...पोस्ट कर रहा हूँ.. मुझे ..अच्छा लगा शायद आपको भी ...सही लगेगा ....
    हमारे देश मैं जितनी जल्दी कोई फिल्म रिलीज होती है ...उससे ज्यादा जल्दी लहू ..के दाग मिट जाते है ....जब आप ये पढ़ रहे होंगे तब मुंबई ब्लास्ट के न्यूज़ कदाचित आप भूल भी गए होंगे ...लेकिन वोट के बदले मौत लेने वाले एक आम हिन्दुस्तानी के घाव अभी तक या तो कभी भी नहीं मिट शकते है ...फिर से हम अपने अपने काम मैं लग गए .... लेकिन इस ब्लास्ट मैं जिन्होंने भी अपना कुछ खोया है ...अरे कुछ लोगो ने तो  अपना सब कुछ खो दिया है ..... वो क्या ये भूल शकेंगे ....? कब तक चले गा ....?कुछ ..कवी ..और शायरो ने लिखा है ........
 .. महेनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती ....
..पुलिश की मार सबसे खतरनाक नहीं होती ...
...गद्दारी और लोभ की मुठ्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती.....
......................लेकिन .....
सबसे खतरनक् होता है मुर्दा सांति से भर जाना ...
तड़प का न होना .......................................
सब कुछ सहन कर जाना .....
घर से निकलना काम पर और ...
 .....काम से लौट कर न आना....सबसे ...
खतरनक् होता है ...हमारे सपनो का मार जाना ....
 ................सबसे खतरनाक ......वो चाँद होता है ...
जो हर हत्या कांड के बाद भी वीरान हुए आँगन मैं चढ़के आता है ..
......................हमारी आज को दाव पे लगा के हर पाँच साल के बाद वो आजाते है ..हमारी कल को सवारने के लिए ..और हम भी एक ..नादाँ की तरह ...उनको ..मान भी लेते है ... दे देते है अपनी रखा और खुश हाली की जिम्मेदारी उनके कंधो पर ..
..जैसे ... गुलज़ार सब ने कहा है की ..
..".आदतन तुमने कर दिए वादे ...
आदतन हमने एतबार  कर लिया...."
लेकिन अब ....
"अब न मांगेंगे जिन्दगी या रब ...
ये गुनाह हमने एक बार कर लिया" ....
......उनके कानो तक ये आवाज़ कदाचित नहीं पहुचेगी ...लेकिन ...
उनको क्या अपनी रोटी मैं हमारे खून की बू भी नहीं आती होंगी ...
..क्योकि ..आज ..एक आदमी रोटी बेलता है ...एक रोटी शेकता है ..एक उसे खता है ..और एक ...रोटी से ही खेलता रहता है ...
.........कौन है ये .. जो रोटी से खेलता रहता है ....?लेकिन इन सबसे हमें क्या......?
क्योकि ...लोहे का स्वाद लोहार से मत पूछो ...घोड़े से पूछो ...
जिसके मुंह मैं लगाम है ....
 .......वैसे ही ...इनसब बातो का ..ख्याल तो उनको ही होगा जिस किशिने भी अपना ..बेटा खोया है ...किशिने अपना शिन्दूर मिटाया है ..यतो किशिने उशको स्कूल भेजने वाला पिता खोया है ..
क्या बस बातो से ही काम चल जायेगा ...
 ....लेकिन सिर्फ हंगामा पैदा करना मेरा मकसद नहीं ...मेरी कोशिश है की सूरत बदलनी चाहिए ...
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