नमस्कार मित्रो .......
पूरा साल चला गया ...और नए साल की सुरुआत भी हो गयी ....ये वक़्त कभी या तो कंही ठहरने का नाम ही नहीं लेता ....वो तो बस चलता ही रहता है ...एक ही गति ..से चलता ही रहता है ... नो वो कभी ..त्वरित चलता है नहीं कभी मंद गति से ...वोतो अपनी ही मस्ती मैं ज़ुमते गाते रोते रुलाते हँसते हसते बस चलता ही रहता है ....और इस वक़्त की गाड़ी के साथ हम भी कभी आगे तो कभी पीछे बस उसका साथ लेने की कोशिश मैं दौड़े जाते है ...मगर ...........................??????????????????
बस यही एक ??????? हमारे मन मैं रहता है की क्या हम कभी उसका साथ ले पाएंगे ....कभी ये वक़्त हमारे साथ हो भी जाता है तो हम वक़्त से पहले ही वक़्त से आगे निकलने की कोशिश मैं लग जाते है ......मगर कोई न कोई दिक्कत ...हमारी वाही रफ़्तार को रोक लेती है ...और फिर हम उसी रेस मैं वापस वक़्त का पीछा करने लग जाते है ....
और इसी अफरा तफरी को ही तो हम .....जीवन कहते है .....
इसी जीवन मैं अगर ... हम केवल ... वक़्त ..स्थल और ..संजोग इन ही बातो को ध्यान मैं रखकर चले तो जीवन की गाड़ी ....हम्मेसा .वक़्त के साथ ही चलती रहती है .....
वक़्त चलता ही रहता है ...न रुकता है न ठहरता है ..
बस चलता ही रहता है .न धीरे न ही त्वरित चलता है .
वोतो अपनी मर्यादा को देखकर चलता ही रहता है ..
न ही बाये देखता है ,,, न वो दायें देखता है ..न ऊपर
..देखता है न ही निचे देखता है ...आगे पीछे .बिना देखे चलता रहता है .

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