सुप्रभात ....
स्नेहीजनो........
स्नेह कितना सुन्दर सब्द है .................... ...
सुन्दर भी कितना सुन्दर सब्द है ...... सब्दो की भ्रमजल मैं हर किशी न किशिमें कुछ न कुछ तो सुन्दर होता ही है......
किशी का चेहरा सुन्दर होता है .... तो किशिका मन सुन्दर होताहै ..... किशिकी आँखे सुन्दर होती है तो ... कोई ..बाते सुन्दर करता है...... लिखने मैं वक़्त कम पड जाये ........ इतना सुन्दर यह ... विषय है.....
लेकिन सही मैं देखे तो आप जिसको भी जैसे देखेंगे वैसा ही वह दिखेगा.. ......
यानि के आपकी सोच अगर सुन्दर होगी तो आपको सब कुछ सुन्दर लगेगा.......
मैंने एक किताब पढ़ी थी ...........आचार्य श्री चाणक्य के बारेमें.......उसमे मगध का महाराज धना नन्द उसके राज्य दरबार मैं एक ब्रह्मिन को देखकर बोलता है .....
''यह कौन है काला कलूटा ....भूत जैसा कुरूप....जिसकी शकल देखने से ही मन ख़राब होता है....
कैसे आया यह हमारे राज दरबार मैं ?.."
राजा धनानंद ने उस कुरूप आदमी को देखकर.. चिल्लाते हुए कहा... ... था ....और कुछ साल बाद उसी कुरूप इन्सान ने ..भारत को एक महान साम्राज्य की भेट दीथी
किशी की बाह्य कुरूपता देखते ही ........ उसकी आंतरिक सुन्दरता ....ना देखाने के कारण राजा नन्द का हस्र हुआ ये तो कदाचित हम जानते ही ....है ...
इस एक वाक्य ने भारत को एक महान आचार्य .... चाणक्य और महान शाशक.... चन्द्र गुप्त दिया है....
................... ....... एक व्यक्ति की कुरूप हरकत के कारण भारत देश को एक सुन्दर शाशक और एक सुन्दर ..तत्व चिन्तक की भेट मिलिहै.....
आगे सुन्दरता के बारेमें .....बहुत लिखना है.......... देखते रहीये ... मेरी अगली पोस्ट ......
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर कुछ जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है......
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