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गुरुवार, 30 जून 2011

relation......................

नमस्ते... मित्रो .....
          ................. संबध ....relation......
              what is the means of this word.... ?
 if we think about it  !...... lots of ... .as we ... like ...or not like .....
 this is the most important word .... for ... life ..
 bcuz we all ... live in relationsheep.... no one live without relation .... m i wrong ?
                वैसे देखने जाये तो हमारे जीवन पे relation का बहुत बड़ा प्रभाव होता है....
मर्जी या तो नामर्जी से relation बनते और बिगड़ते रहते है ....संबधो का बनना यतो बिगड़ना ये सुख और दुःख का 
एक अभिन्न घटक है ....
        अगर देखने जाएतो ..relation मै आदमी की प्रकृति यानि के स्वभाव का  बहुत ... बड़ा हिस्सा होताहै..  
   बहुत ही स्वार्थी उग्र यातो संकाशिल स्वभाव के आदमी के relation कभी ज्यादा टिकते नहीं ...
और  बिना स्वार्थ ..धीरज और माफ़ करने की पृकृति वाले लोगो के relation जीवन भर टिके रहते है ...
   देखने जाएतो हमारे जीवन की पूर्णता होने तक ... हमें कितने प्रकार के relation निभाने का मौका मिलता है .....
 ------- माता और संतान  ...के  सम्बन्ध
--------पिता और संतान ....
-------मित्र ..
------भाई -भाई
---भाई -बहन
---गुरु -शिष्य
---नेता और प्रजा
====सबसे बड़ी प्रेम सगाई ..
----दुश्मनी का ...relation .......
कई प्रकार के अन्य relation ...
 .................................
            .......   ........लेकिन ...relation .. सिर्फ दो प्रकार के ही होते है ...
१.ऊपर वाले ने बनाए हुए relation ..
२.हमने खुद बनाए हुए relation ...
................ बोर तो नहीं हुए ..?अगर हुए है तो माफ़ करना आज छोड़ देता हूँ.. कल इसी टोपिक पे कुछ और चर्चा करेंगे ....
                    
" कुछ    रिश्ते उपरवाला बनता है.
कुछ रिश्ते लोगबनाते है...
पर वो लोग बहुत खास होते है                        .
जो बिना रिश्ते के कोई रिश्ता निभाते  है.."
              


                            

   

सोमवार, 27 जून 2011

FILLINGS OR THINGS.......

GOOD EVENING FRIENDS ...



जब मृत्यु हमारे समक्ष खड़ी होती है तो हमारी समस्त व्यस्ततायें गिर जाती हैं।
File:Tsunami relief by rss volunteers.JPG

मैं किसी को प्रेम करता हूं, तो चाहता हूं कि कल भी मेरा प्रेम कायम रहे;
चाहता हूं कि जिसने मुझे आज प्रेम दिया, वह कल भी मुझे प्रेम दे। अब कल का भरोसा सिर्फ वस्तु का किया जा सकता है, व्यक्ति का नहीं किया जा सकता।

हम जिसको परिवार कहते हैं, समाज कहते हैं, वह व्यक्तियों का समूह कम, वस्तुओं का संग"ह ज्यादा है। यह जो हमारी स्थिति है, इसके पीछे अगर हम खोजने जाएं, तो लाओत्से जो कहता है, वही घटना मिलेगी। असल में, जहां है नाम, वहां व्यक्ति विलीन हो जाएगा, चेतना खो जाएगी और वस्तु रह जाएगी। अगर मैंने किसी से इतना भी कहा कि मैं तुम्हारा प्रेमी हूं, तो मैं वस्तु बन गया। मैंने नाम दे दिया एक जीवंत घटना को, जो अभी बढ़ती और बड़ी होती, फैलती और नई होती। और पता नहीं, कैसी होती! कल क्या होता, नहीं कहा जा सकता था। मैंने दिया नाम, अब मैंने सीमा बांधी। अब मैं कल रोकूंगा, उससे अन्यथा न होने दूंगा जो मैंने नाम दिया है। अस्तित्व का जो अनुभव है, अगर हम नाम को छोड़ दें, तो या तो सुख की भांति होता है या दुख की भांति होता है। और सुख और दुख भी दो चीजें नहीं हैं।
"हम वस्तुओं के जगत में रहते हैं। न तो हम पदार्थ के जगत में रहते हैं और न हम स्वर्ग के, चेतना के जगत में रहते हैं। हम वस्तुओं के जगत में रहते हैं। इसे ठीक से, अपने आस-पास थोड़ी नजर फेंक कर देखेंगे, तो समझ में आ सकेगा। हम वस्तुओं के जगत में रहते हैं-वी लिव इन थिंग्स। ऐसा नहीं कि आपके घर में फर्नीचर है, इसलिए आप वस्तुओं में रहते हैं; मकान है, इसलिए वस्तुओं में रहते हैं; धन है, इसलिए वस्तुओं में रहते हैं। नहीं; फर्नीचर, मकान और धन और दरवाजे और दीवारें, ये तो वस्तुएं हैं ही। लेकिन इन दीवार-दरवाजों, इस फर्नीचर और वस्तुओं के बीच में जो लोग रहते हैं, वे भी करीब-करीब वस्तुएं हो जाते हैं।..............
               ..............बहुत बड़ी बात कही है ....... अगर समज....मैं आ गयी तो .............
 फीलिंग्स (एहसास) और थिंग्स(चीज़) मैं फरक आ जायेगा........
         परिवार मै प्यार ..... बेशुमार होजायेगा....

Family Relationships


Hindu spirituality has been largely nurtured in a rural setting, and scripture recommends a simple life, free from unnecessary complication. Varnashrama-dharma is closely associated with an agrarian culture, which fosters a mood of dependence on God. According to theologians, the village demonstrates the influence of goodness (sattva), the town is compelled by passion (rajas) and sinful places, such as many modern cities, are bound by ignorance (tamas). The whole system of varnashrama-dharma is designed to bring everyone, step by step, to the level of goodness, more easily attained in a rural setting. Sustainability and a peaceful, regulated lifestyle are principal characteristics of sattva-guna.
The early morning hours are also considered sattvic and in India people rise early, between 4 and 6 am. Practically everyone bathes upon rising, making use of a pond, river or hand-pump, or – if relatively well-off – a bathroom. It is common in the morning to see Hindus outside their simple dwellings, slowly cleaning their teeth with a twig from a tree, such as the antiseptic neem. Life is relatively slow, with morning hours dedicated to some form of worship. A light breakfast follows at around eight o'clock. Shops and stalls open quite late, around ten. The main meal is lunch – for the digestion is considered strongest when the sun is at its highest. People take a siesta in the sultry afternoons, and shops and stalls either close, or the shopkeeper takes a snooze. They often open late into the evening, when it is pleasantly cool, and people again throng to the streets and the temples.
Life is very much in contact with nature and the elements. Water is drawn straight from wells or rivers. Cooking is over open fires. Village homes have an earth floor, coated with a mixture of earth and cow-dung, which has antiseptic properties. Animals are very much a part of life. Dogs are not domesticated, and live quite differently than in the West. Cows roam freely and are given much leeway. Wild pigs, often part of the natural scenery are valued for their function of waste disposal. Monkeys are notorious for their mischief and their stealing (eye-glasses are now a favourite!). Camels, ponies, and buffalo are used for pulling carts. In the south especially, elephants are used in temple rituals.There are many stories about snakes, especially the cobra, which is considered to have mystical powers. Today, there are still many physicians who can cure a snake bite by chanting mantras rather than administering a serum. Mysticism and spirituality are woven into the colourful fabric of everyday life.

vanprasth ashram....

GOOD EVENING FRIENDS ....
AFTER LONG TIME .....
       I FEEL SOMETHING ABOUT ... SENIER CITIZEN ..... SO I WANT TO SAY .. ABOUT THEM ........
  हमारे देश की संस्कृति मै सबसे पहले शिखाया  जाताथा...
            मातृदेवो भव;....
         पितृदेवो भवह ...
      अतिथिदेवो भवह...
   लेकिन आज ... क्या हो रहा है ... आज ... हमारे यहाँ माता -पिता को कुछ लोग ... वृध्धाश्रम मै ..... छोड़ आते है ..... और ...अपनी जिम्मेवारी से मुक्त होने का सोचते है ... ....
लेकिन क्या वोह लोग अपनी जिम्मेवारी से मुक्त होसकते है ...?
  ...... 
    .....किसीने ठीक  ही कहा है..
     
    क्या हम कभी ... बुढ्ढे नहीं होने वाले ......?
             
    
     Jab Tu Paida Hua Kitna Majboor Tha Yeh Jahan Teri Sochon Se Bhi Door Tha.
     
    Haath Paon Bhi Tab Tere Apne Na The, Teri Aankhoon Mein Duniya Ke Sapne Na The.
     
    Tujh Ko Aata Sirf Rona Hi Tha, Doodh Pee Ke Kaam Tera Sona Hi THa.
     
    Tujh Ko Chalna Sikhaya Tha Maa Ne Teri, Tujh Ko Dil Mein Basaya Tha Maa Ne Teri.
     
    Maa Ke Saaye Mein Parwan Chadhne Laga, Waqt Ke Saath Qad Tera Badhne Laga.
     
    Aahista Aahista Tu Kadiyal Jawaan Ho Gaya, Tujh Pe Sara Jahaan Mehrbaan Ho Gaya.
     
    Zor Bazoo Pe Tu Baat Karne Laga, Khud Hi Sajne Laga Khud Hi Sawarne Laga.
     
    Aik Din Ik Haseena Tujhe Bhaa Gayee, Ban Ke Dulhan Woh Tere Ghar Aa Gayee.
     
    Farz se Apne Tu Door Hone Laga, Beenj Nafrat Ka Khud Hi Tu Bone Laga

मंगलवार, 14 जून 2011

tention................................

नमस्कार ..............
            ...........................दोस्तों ...... 
     टेंसन क्या होता है ......... यह बात कल मुझे पता चली ...... दो दीन से एक प्रोब्लेम .... अचानक कहा से आ गयी ... 
 पता ही नहीं चला ....... पहले जब लोग कहते थे ..... आज थोडा सा टेंसन ...परेशानी है तो मै हसी में उडा देता था
 लेकिन  जब खुद पे बन आई तो महसूस किया की परेशानी क्या होती है .....
    खेर ... वोतो... आई और चली भी गयी लेकिन जीने की एक नयी राह.... दिखाके गयी ...
....... फिर भी आपसे बात कर के मैंने अपनी परेशानी को भी थोडासा कम कर लिया .........
 आप सब का आभार.......... ...
             कोई कहता है की  कहने से गम कम नहीं होते .....
        आज मैंने जाना की कहने से गम... गम ही नहीं रहते....
 ..... दोस्तों .... दो दिन तक मै कुछ लिख नहीं पाया .... और आज जब लिख ने बैठा हूँ तो अपनी परेशानी आपके ऊपर थोप रहा हूँ..... माफ़ करना दोस्तों लेकिन मैंने  पहले लिखा था की .......
"गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिंतयेत्।
वर्तमानेन कालेन वर्तयंति विचक्षणाः॥"
 और वैसे भी सर्वतो भद्र के बारे मैं भी शोचकर निकले..
तो आप जरुर ... किसीका भला कर देंगे .. और आपको पता भी नहीं चलेगा .... और ///आपका कोई नुकसान भी नहीं होगा...
और आपको एक अनन्य आनंद की प्राप्ति होगी...
 इस लिए मैंने आपको एक अनन्य आनंद की प्राप्ति देने के लिए आपको यह सब लिखा है .. ......वर्ना ....
      .......जब परेशानी आती है तब लिखना पड़ता है ...
"तरसते  थे  जो  मिलने  को  हमसे  कभी
आज  वोह  क्यों  मेरे  साए  से  कतराते  है ,
हम  भी ... वही  है  दिल  भी  वही  है ,
न  जाने  क्यूँ  लोग  ही  बदल  जाते  है "...किशी दोस्त ने लिखा था ...
 लेकिन दोस्तों आप सब तो .....किशी की भी परेशानी  बाट कर ... उसे ख़ुशी में बदल देने वालो में से है .... ...
 ................. चलो आपके हिस्से मै थोड़ी सी परेशानी आ गयी होतो मुझसे  बाट लेना .... ..
 बाट ने से गम कम ..अरे  ...  गम ही नहीं रहेगा ,,,,,experiance .....
 चलो  ...... मिलते  है  .....
                              
  

शनिवार, 11 जून 2011

friend sheep.......................

good morning ..............
        ................... दोस्तों  ////....
               आज दोस्तों आप की ... दोस्ती ....  के बारे मैं ....बात करने ... का बहूत दिल करता है ........और ..... जोभी ... दिल की तमन्ना हो  वो पूरी कर लेता हूँ.... ...आपके दिमाग  पे थोडा सा असर होगा बर्दास्त कर लेना ....
 ........................क्या होती है ये ... दोस्ती ... कब होती ...है ... और कैसे होजाती  है .... .....पता ही नहीं चलता ... और हा .... किससे होजाती है ....? वोह भी तो नहीं जानते ....
 कई लोग दोस्ती करते है .... अपने काम निपटाने के लिए ..... कुछ.. लोग ... .. दोस्ती अपने मतलब से करते .. है ..वो भी प्लान्नीग से .. ..
   .............. खेर जो भी करते है ..... उनका काम ..
            लेकिन ... दोस्ती ... यारी ..मैत्री ... .... बहुत ... खुबसूरत ... एहसास है ... वो दिलसे ही होती है ..दोस्ती कभी की नहीं जाती .... वो तो होजाती है .... किससे कब ... कहा कैसे हो जाती है .... वो कोई नहीं जानता ....
  ...... ................  और आजकल तो ..जिसे हम मिले नहीं ... जिसके बारे मैं कुछ जानते नहीं ... उससे भी बहूत गहिरी दोस्ती हो जाती  है  . .... .... net work ....के जरिये ...
   लेकिन दोस्तों ....
 दोस्ती  अच्छी  हो  तोह  रंग   लाती    है ,
दोस्ती  गहरी  हो  तोह  सबको  भाति  है ,
दोस्ती  नादाँ  हो  तोह  टूट  जाती  है ,
पर  अगर  दोस्ती  दिल से   हो ….
…. तोह  इतिहास  बनाती  है  !.....
 बस ज्यादा नहीं लिख    पाया .................. 
            वैसे इस बात को   लिखने    के लिए तो जगह कम पड़ जाये  फिर भी ... आज बस  ..

Dosti Shayari Scraps
ok dosto ......................meet again .... bcuz we r true friend .....................

गुरुवार, 9 जून 2011

"SARVTO BHADRA SANSKAR...": kuchh ..... intresting ......

"SARVTO BHADRA SANSKAR...": kuchh ..... intresting ......: ".. good ... morning friends ..... .... philoshophy ..... और ... social जैसे .... critical subject पे बहुत बाते करली ..... दोस..."

kuchh ..... intresting ......

.. good ... morning friends .....
    .... philoshophy ..... और  ... social  जैसे  ....   critical subject पे  बहुत  बाते  करली   ..... दोस्तों  ...  ....
 आज मन करता है कुछ,....... और बात करते ....है ... कुछ अलग कुछ हँसने की बात कुछ हँसाने की बात .... .... on joyfull topic ..........
         आपको लगता है कर सकूँगा ऐसी कुछ बात .... मैं भी सौच रहू हु दोस्तों क्या बात करू ....
 कोनसे विषय पे सुरुआत करू....... चलो कुछ सोचता हूँ.... आपको भी खुश करने की कोशिश करता हूँ... काफी देर तक गंभीर विषयों पे चर्चा करली .... आज मुझे भी लगता है कुछ .......नया कुछ intresting   ......
 .....................
...........  मेरे एक दोस्त ने FACE BOOK  की  wall पे  ये पोस्ट रखी है  .....
ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो ...
ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो ...
आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो ...
आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो ..
जिसे देख नहीं सकते उसकी आवाज़ में ही खुश रहो

 बहुत ..... कम लोग इसी ख़ुशी को ....  ले पाते है .......
   आजभी ...हम जब घर मै... परिवार के साथ होते है .... तो हमारे .. माता पिता  कुछ  न कुछ पुरानी बाते ... यतो उनके लम्हों को याद करते है ....और उन यादो मैं ही कोई ...वो लोग खुश रहते है.... ... और कुछ बातो मैं तो हमें भी खुश कर जाते है ...
           ऐसी ही कुछ बाते जो मेरे पापा .. कई बार ...  कहते  रहते है वोह मैं आपके साथ बाँट रहा हूँ ..
    मेरे पापा अक्स़र एक आदमी के बारे मैं बात करते है ...
        उसका नाम है देवा   ..........
            देवा एक  .... बहुत ही आराम प्रिय  और .....आलसी ... अपनी ही मस्ती मैं मस्त रहने वाला .. इन्सान था...  वोह ..मेरे पापा के  मित्र नतु भाई  जो एक आश्रम चलाते है ...उनके वहा रहता था ...और बस आनंद करता था ...
         एक दिन  देवा ने कहा .... नतु भाई एक दिन मेरे ऊपर से ...कितनी ही ट्रक ..ट्रक्टर ... जीप ..और बहुत ही गाड़िया चली थी ....
       नतु भाई ने कहा .... क्या बात करता है क्यों झूठ बोलता है ... एसा कभी हो सकता है ...
 उसने बोला ...नहीं नतु भाई मै सच कह रहा हूँ ..
नतु भाई ने कहा..... इतनी गाड़िया जाने के बाद भी तुजे कुच्छ नहीं हुआ ...
तो उसने कहा ....कहा से होगा मैं पूल के निचे सोया हुआ था.....
 इसी ही कई बाते... जो मेरे पापा की जुबान से सुने तो हम भी  खुश होजाते है...
 .........एकदिन नतु भाई के आश्रम मैं एक आदमी साँस की बीमारी के चलते आया ...
वोह नातुभई से बोला नतु भाई ये साँस की बीमारी से मैं परेसान होगया हूँ.
कुछ इलाज बतइए....
उसी वक़्त देवा भी वही था .... ..तुरंत वोह बोला इलाज है ..... मेरे पास ....
 दर्दी बोला બોલ ને ભાઈ ... જો તારી દવા થી મટતું હોય તો ....

तुरंत ही देवा बोला .... D D T .... यानि ... जंतु नाशक ... दवाई ...
 એક જ ફાંકડા માં સ્વાશ બેસી જશે .... ....
इसी ही कई छोटी बातोसे भी हम खुश होजाते है.... .
 AFTER ALL ..आज मैंने आपको खुश करने की थोडीसी कोशिश की है ..इस लिए ..
बिता हुआ कल जा चूका है , उसकी मीठी यादों में ही खुश रहो ...
आने वाले पल का पता नहीं ... सपनो में ही खुश रहो ....
............... बस कुछ न खछ लिखता रहता हूँ ... अगर बुरा लगे तो बिना पढ़े ही खुश रहो...
 मिलते है ......

बुधवार, 8 जून 2011

curruption........ ek kusanskar....

curruption.........
                      whats this....?
आजकल ...... चारो तरफ यह एक सब्द बहुत .....चर्चा मै है.................क्या है ये भ्रस्टाचार ......?
 क्यों इतना हंगामा होरहा है इस मुद्दे पर.......क्या  भ्रस्टाचार खिलाफ आन्दोलन चलाने वाले सरे लोग ..... एक दम क्लीन है...... .क्या पैसो की लेन देन ही भ्रस्टाचार है.... ....
              .......क्या सही मैं भ्रस्टाचार से इस देसको मुक्ति मिल शक्ति है........
    देखा जाये तो ..... भ्रस्टाचार  मतलब .... भ्रष्ट आचार ......
१. विचार से भी भ्रस्टाचार होता है .
२. दृष्टि से  भी भ्रस्टाचार  होता है..
३.आचार से भी भ्रस्टाचार होता है...
४.शारीरिक भ्रस्टाचार होता है
५. मानशिक भ्रस्टाचार होता है....
 .......................यहाँ कोनसे भ्रस्टाचार के बारेमे बात होरही है ........ कोनसे भ्रस्टाचार को मिटाने के लिए आन्दोलन होरहा है........ और जो लड़ रहे है वोह भी क्या भ्रष्टाचार से मुक्त है .....
 .......भ्रष्टाचार  एक कुसंस्कार है इसको मिटाने केलिए ....संस्कार की जरूरत है .... और वोह बचपन सेहि.....मिलते है .... अगर आप आजसेही अपने बच्चे मै यह संस्कार देने की सुरुआत करेंगे तो .... बीस साल बाद आपको इसका परिणाम मिलाना सुरु होगा......
        ......... ..फिरभी आज जो होरहा है  वो एक बहुत ही अच्छा प्रयाश है .......
और इसमें हमें भी सामिल होना चाहीये ....... 
     लेकिन एक बात जरूर हमें ध्यान मै लेनी चाहिए .... क्या हम भ्रष्टाचार से मुक्त है ...?
क्या हमने कभी भ्रस्टाचार नहीं किया ...?
  ................तो ...इसके लिए सुरुआत अपने आपसे करनी होगी ..... अगर भ्रस्टाचार मुक्त भारत का सपना देखना है ...तो सबसे पहले ... खुद को भ्रस्टाचार मुक्त होना होगा....
 और वो भी ऊपर बताए गए सब प्रकार के भ्रस्टाचार से ..........
           .................. ठीक है दोस्तों आज टीवी पे सुभाह से साम तक एक ही बात होरही है ....तो मैं भी थोडासा   .... ज़ज्बाती होगये ..... 
 मेरी बात ठीक लगे तो जरूर से .. .....फोरवर्ड करना.......... और अगर न लगे ... तो माफ़ करना .....
 ......... मिलते है ... 
    .......

सोमवार, 6 जून 2011

HOW MANY tax paid by every indian..... did you know..?

hello...............
 my dear ... ..................... friends....
                     how r u...? fine ....
 all r say this ...... well .... ok... ... i too say i m fine....
             ... baba ramdev movement.. for .. .... black money ...for our country.....
 do u know how many white money as tax ..... all of us paid to govt.......... & whats .... benifit of our tax to us....
             ( बाबा रामदेव  कालाधन वापस  भारत मैं लेन के लिए आन्दोलन कर रहे है...   ..क्या आप जानते हो ?कितना .. सफ़ेद धन आप सर्कार को टैक्स के रूप मैं दे रहेहो ...और इसका क्या फायदा हम सब ले पाते हैं.... )
                  .............  भारत का हर आदमी चाहे वोह अमिर होया तो गरीब ....सब जाने या अनजाने मैं ... ज्यादासे ज्यादा टैक्स पे करता है.....
   अप रोज का खाना .... यातो जोभी खरीद करते है उसमे से १५% टेक्स सरकार लेजाती है ... ..
 बिजली के बिल मैसे  भी करीबन  ३० से ४०% टेक्स .... हम दे रहे है ... मोबाइल यातो लैंड लाइन फ़ोन के बिल मैसे भी करीबन टैक्स सरकार मैं दे रहे है .... आप अगर नयी प्रोपर्टी खरीद करते है ...
 या तो बेचते है तब भी कुछ न कुछ टैक्स के रूप मै हम दे रहे है....
         यानि ...... कुल मिलकर हम जोभी ... काम करते है सब मैं से कुछ कुछ हिस्सा सरकार को दे रहे ... है... और उपरसे ये काला धन .... ....... फिर भी ...... हमारा देश .... . वर्ल्ड बैंक मैसे .... लोन ले कर डेवलोप  हो रहा है ....  क्या सही मैं हमारे पैसे का सही इस्तमाल होरहा है ....
                 इस सवाल के जवाब मैं हम सब मिलकर बोलेंगे नहीं .........
       अगर नहीं तो फिर क्यों नहीं...?
 भगवान कृष्ण ने गीता मैं कहा है ....की अन्याय करने वाले से ज्यादा अन्याय सहने वाला ज्यादा गुनहगार है.......
think some thing abot it .................................................. pls..............................................
 milte hai............................
                           

रविवार, 5 जून 2011

baba ramdev............whats up......? if he was not success..

good evening
 friends......
                    आज पूरा दिन ..... टीवी ............. मैं न्यूज़ .... देखते रहे होंगे ... क्योकि आज फिर कुछ नया मोड़ ... देश के मूल प्रश्नों के बारेमें आने की ...उम्मीद जाग रही है....... ...
     क्या लगता है बाबा कुछ कर पाएंगे? ..... क्या जनता बाबा और अन्ना जी को सप्पोर्ट करेगी?....
 क्या सही मैं बाबा सच की लड़ाई लड़ रहे है  ?... क्या आज सारे ..... क्रांति लाने की ... कोशिश करने वाले लोग  चाहे  कांग्रेस भाजपा या तो अन्य किशी भी पार्टी या तो संगठन से हो ... एक जुट होंगे ..?
 क्या यह देश मैं नयी क्रांति .... आ पायेगी.....? क्या सरकार  ....जूठे  वादे करके .... इन लोगो को समजा लेगी ....?  ........बहुत से सवाल उठ रहे है दिमाग मैं......
                    आजसे दो दिन पहले के पोस्ट मैं मैंने .... क्यों के विषय में... लिखा  था और आज ही ....
 मेरे खुद के दिमाग मई ये सारे सवाल .... हो रहे है......
 मुजे पता है ...आपभी यही.... सब सोचते होंगे....
                    तो दुआ करो .... कुछ तो हो.... कुछ तो बदलाव आये ..... ...
     
हर  दील  में  एक  तम्मना  जरुर  होती  है ,
हर  दिल  में  एक  ख्वाहिस   जरुर  होती  है ,
मुमकिन  नहीं  हर  दिल  कुर्बान  जाये  इस  देश  पर ,
लेकिन  हर  दिल  में  कुर्बान  होने  की  लगन  जरुर  होती  है .

स्नेह कितना सुन्दर सब्द है ....................

सुप्रभात ....
            स्नेहीजनो........ 
                              स्नेह कितना सुन्दर सब्द है .................... ...
सुन्दर भी कितना सुन्दर सब्द है ...... सब्दो की भ्रमजल मैं  हर किशी न किशिमें कुछ न कुछ तो सुन्दर होता ही है...... 
 किशी का चेहरा सुन्दर होता है .... तो किशिका मन सुन्दर होताहै ..... किशिकी आँखे सुन्दर होती है तो ... कोई ..बाते सुन्दर करता है...... लिखने मैं वक़्त कम पड जाये ........ इतना सुन्दर यह ... विषय है.....
   लेकिन सही मैं देखे तो आप जिसको भी जैसे देखेंगे वैसा ही वह दिखेगा.. ......
        यानि के आपकी सोच अगर सुन्दर होगी तो आपको सब कुछ सुन्दर लगेगा.......
           मैंने एक किताब पढ़ी थी ...........आचार्य श्री चाणक्य के बारेमें.......उसमे मगध का महाराज धना नन्द उसके राज्य दरबार मैं एक ब्रह्मिन को देखकर बोलता है .....
    ''यह कौन है काला  कलूटा ....भूत जैसा कुरूप....जिसकी शकल देखने से ही मन ख़राब होता है....
कैसे आया यह हमारे राज दरबार मैं ?.."
राजा धनानंद ने उस कुरूप आदमी को देखकर.. चिल्लाते हुए कहा... ... था ....और कुछ साल बाद उसी कुरूप इन्सान ने ..भारत को एक महान साम्राज्य की भेट दीथी
          किशी की बाह्य कुरूपता देखते ही ........ उसकी आंतरिक सुन्दरता ....ना देखाने के कारण  राजा  नन्द का हस्र हुआ ये तो कदाचित हम जानते ही ....है ...
इस एक वाक्य ने भारत को एक महान आचार्य .... चाणक्य और महान  शाशक....   चन्द्र गुप्त दिया है....
 ................... ....... एक व्यक्ति की कुरूप हरकत के कारण भारत देश को एक सुन्दर शाशक और एक सुन्दर ..तत्व चिन्तक  की भेट मिलिहै..... 
                      आगे सुन्दरता के बारेमें .....बहुत लिखना है.......... देखते रहीये ... मेरी अगली पोस्ट  ......
 जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर कुछ  जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है......
            .........
                 

शनिवार, 4 जून 2011

today's famous baba ramdev.....................................

good morning ................
             मित्रो.........
 आजकल मिडिया .... मैं सबसे  .बड़ा हंगामा  ......... ..... कोनसा चल रहा है...... ?
                                                        और क्यों न हो ..... लोगो को जो स्पर्श करती बात है ..... उस पर एक नया मोड़ लाने की किशिभी कोशिश को ....  लोग 

 समर्थन... जरूर करेंगे...... ..
                               लोकतंत्र ........... अगर ........ तंत्रलोक .... बन जाये तो  ..........क्या होता है......?
 क्या लगता है आपको  .......  बाबा कुछ  बदलाव ला पाएंगे ......
      
"यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् |
परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च: दुष्कृताम, धर्मं संस्थापनार्थाय सम्भावामी युगे युगे ||
...............................कुछ न कुछ  तो जरूर  होगा .............
          think good ..... always be good......
 ok bye friends ....meet again.....
||

शुक्रवार, 3 जून 2011

question....................???????????????????????????????????????

GOOD NOON .......... FRIENDS.....
    QUESTION......?????????????
 DO KNOW ABOUT QUESTION.....
            प्रश्न ............ कितने प्रश्न है इस प्रश्न के बारेमें?....
 सोचने बैठे तो ... यह प्रश्न भी एक प्रश्न ही  है.............कोई जवाब नहीं है.........
 बोर       हो गए ......................
                         वैसे देखने जाये तो हमारा जीवन एक .... प्रश्न ही है........ 
 ...... जीवन मैं भी बहुत सारे प्रश्न है..................... ....
         प्रश्नों के बिच मैं घिर के इन्सान खुद आज प्रश्न मंच....... बन गया है....
     जवाब ढूंढने के लिए वोह ........  कोशिश  मैं लगा रहता है ........ फिर भी उसे उसके सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते.....
            
 क्यों होताहै एसा.? ........ येभी तो एक प्रश्न ही है......
 शायद..... किशिने ठीक ही कहा है.............. अगर हमारे सारे प्रश्नों का उत्तर मिलजाए तो  जीवन जीने की आश ही खत्म होजाती है.....   
      लेकिन दोस्तों जीने का मजा ही हमारे प्रश्नों के उत्तर ढूंढते रहने मैं है........
 आज  कुछ ज्यादा ही  बोर कर दिया ..........
               फिरभी लास्ट मैं मेरे एक प्रश्न का उत्तर दे दीजिये   ....
 कैसा लगा ....... यह ..post............?


Manzile bahut hain
Afsane bahut hain,
Raahe zindagi mein
Imtehan aane bahut hain,
Mat kar gila uska
Jo na mila tujhe,
Es duniya mein
Jine ke bahaane bahut hain......................

गुरुवार, 2 जून 2011

love...................whats this....? dreams.... by... open eyes.....

good morning .....
                       friends.....
                                          .............. only advise ...................... dont worry .....                                            today i write on intresting subject....
 every one want ................. it....
                                    whats this..... ?
 क्या तुमने किसीसे कभी प्यार किया है.........?
  क्या हुआ ........ मैंने तो शिर्फ़ एक फ़िल्मी डायलोग ... ही लिखाहै..
 करीबन हर फिल्म मै ये डायलोग होताहै..........................
 क्या है यह ........ प्रेम ,प्यार ,इश्क .... मोहब्बत .... लव ........ प्रणय......... बहुत सारे नाम दिए गए है ,,,,

 क्या आप जानते है.....
 इश्क के बारे मैं क्या क्या कहा है .....
          किशी शायर से कहो गे तो वोह कहेगा...

दो अजनबी निगाहों का मिलना
मन ही मन में गुलों का खिलना
हाँ, यही प्यार है............ !!
आँखों ने आपस में ही कुछ इजहार किया
हरेक मोड़ पर एक दूसरे का इंतजार किया
हाँ, यही प्यार है............ !!
आँखों की बातें दिलों में उतरती गई
रातों की करवटें और लम्बी होती गई
हाँ, यही प्यार है............ !!
सूनी आँखों में किसी का चेहरा चमकने लगा
हर पल उनसे मिलने को दिल मचलने लगा
हाँ, यही प्यार है............ !!
चाँद व तारे रात के साथी बन गये
न जाने कब वो मेरी जिन्दगी के बाती बन गये
हाँ, यही प्यार है............ !! by................ prince my friend......

अगर कोई   तत्वचिंतक  यातो  भक्त    होगा .... कहेगा
प्रेम एक भावना है
समर्पण है, त्याग है
प्रेम एक संयोग है
तो वियोग भी है
किसने जाना प्रेम का मर्म
दूषित कर दिया लोगों ने
प्रेम की पवित्र भावना को
कभी उसे वासना से जोड़ा
तो कभी सिर्फ उसे पाने से
भूल गये वे कि प्यार सिर्फ
पाना ही नहीं खोना भी है
कृष्ण तो भगवान थे
पर वे भी न पा सके राधा को
फिर भी हम पूजते हैं उन्हें
पतंगा बार-बार जलता है
दीये के पास जाकर
फिर भी वो जाता है
क्योंकि प्यार
मर-मिटना भी सिखाता !! by prince myfriend....
if we ask any scientist...
The theory of a chemical basis for love has been explored by such biological sciences as evolutionary psychology, evolutionary biology, anthropology and neuroscience. Specific chemical substances such as oxytocin are studied in the context of their roles in producing human experiences and behaviors that are associated with love.
                          પરંતુ.... .........વાસ્તવ માં શું છે .... પ્રેમ..................
 પ્રેમ એતો પ્રેમ જ છે તેની કોઈજ વ્યાખ્યા ...... કરવી બહુ અઘરી .....છે....
          ............... आज थोडा सा subject change....किया है.....
 कैसा लगा जरुर बताना...........
                                  चलो  फिर मिलेंगे............................


बुधवार, 1 जून 2011

work.................

good noon......................
         dear friends.....
           how r u ?
                fine .......most say .....i m fine .........
           ऐसा क्यों ?....... जब आप किसिसी से पूछते है ..कैसे हो ?
 ज्यादातर .... लोग कहते है वोह अच्छे है....
 क्या सही मैं सब सच बोलते है....           
 नहीं .... फिर भी लोग कहते है .... और हम... भी स्वीकार कर लेते है की ऐसा ही होता है...
    और  सच  मैं किसीकी भी परेशानी कोई कम भी नहीं कर सकता ...
                   but if we think .... we surely ..do it....?
 how...... ?
               ...... give some simple step  ..... 
1.     Be Open and Honest
2.     Feel Respect, Get Respect
3.       Communicate, Communicate, and Communicate
4.       Read many papers, and learn from both the good and the bad work of others.
5.       always think ...Good editors and reviewers will be objective about your work.
6.       Listen to your Inner Voice
7.      Give Credit to Others ...
       surely ...... if .... after all think.. about sarvato bhadra...... we can do it....

                                 મિત્રો .. રજા આપસો ..... ......
               વધારે ... મગજ....નથી ખાતો...........
 મળીયે..........................................