नमस्ते... मित्रो .....
................. संबध ....relation......
what is the means of this word.... ?
if we think about it !...... lots of ... .as we ... like ...or not like .....
................. संबध ....relation......
what is the means of this word.... ?
if we think about it !...... lots of ... .as we ... like ...or not like .....
this is the most important word .... for ... life ..
bcuz we all ... live in relationsheep.... no one live without relation .... m i wrong ?
वैसे देखने जाये तो हमारे जीवन पे relation का बहुत बड़ा प्रभाव होता है....
मर्जी या तो नामर्जी से relation बनते और बिगड़ते रहते है ....संबधो का बनना यतो बिगड़ना ये सुख और दुःख का
एक अभिन्न घटक है ....
अगर देखने जाएतो ..relation मै आदमी की प्रकृति यानि के स्वभाव का बहुत ... बड़ा हिस्सा होताहै..
बहुत ही स्वार्थी उग्र यातो संकाशिल स्वभाव के आदमी के relation कभी ज्यादा टिकते नहीं ...
और बिना स्वार्थ ..धीरज और माफ़ करने की पृकृति वाले लोगो के relation जीवन भर टिके रहते है ...
देखने जाएतो हमारे जीवन की पूर्णता होने तक ... हमें कितने प्रकार के relation निभाने का मौका मिलता है .....
------- माता और संतान ...के सम्बन्ध
--------पिता और संतान ....
-------मित्र ..
------भाई -भाई
---भाई -बहन
---गुरु -शिष्य
---नेता और प्रजा
====सबसे बड़ी प्रेम सगाई ..
----दुश्मनी का ...relation .......
कई प्रकार के अन्य relation ...
.................................
....... ........लेकिन ...relation .. सिर्फ दो प्रकार के ही होते है ...
१.ऊपर वाले ने बनाए हुए relation ..
२.हमने खुद बनाए हुए relation ...
................ बोर तो नहीं हुए ..?अगर हुए है तो माफ़ करना आज छोड़ देता हूँ.. कल इसी टोपिक पे कुछ और चर्चा करेंगे ....
" कुछ रिश्ते उपरवाला बनता है.कुछ रिश्ते लोगबनाते है...पर वो लोग बहुत खास होते है .जो बिना रिश्ते के कोई रिश्ता निभाते है.."






