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सोमवार, 30 मई 2011

dharm aur sanskar..............

 GOOD EVENING ....... મિત્રો ....ધર્મ અને સંસ્કાર એ વિષે .....
                               धर्म शब्द के अनेक अर्थ है. धर्मकर्तव्य जैसे माता -पिता की आज्ञा का पालन करना पुत्र का धर्म है. गुरु के बताये मार्ग पर चलना शिष्य का धर्म है.धर्म यानि के स्वभाव या गुण जैसे आग काधर्म है जलना..और जलाना... और अलग दृष्टी से देखे तो प्रकाश देना..
पानी का धर्म है गिला करना... या तो प्यास बुज़ाना...
 ऋषि ओ ने धर्म की परिभाषा करते हुए बतःई की जिससे सांसारिक तथा आध्यात्मिक उन्नति हो... वोह है धर्म..
 अर्थात ...वे विचार शिधान्त,नियम और आचरण को ही धर्म कहेते है. शम्पूर्ण  जीवन धर्म कर्म के आधीन है.
        हमारे धर्म को मानव धर्म, आर्य धर्म  , वैदिक धर्म  कहते है...
 धर्म ग्रंथो मै नारी का स्थान  पुरुष से ऊँचा बताया गया है...
          
"यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः।

यत्र तास्तु न पूज्यंते तत्र सर्वाफलक्रियाः॥"


जहा नारी का आदर होता है .. वहा देवता रहेते है.
जहा उनका आदर नहीं होता वहा सरे कार्य निष्फल रहेते है..
 यानि के  
 our next step to sarvto bhadra is .... हम तो आदर करते  ही है..
         to give owner to women ....  if we all think & take step about owner to women ...
 all the women include our family ...is so proud on us ...

 और  यही है संस्कार...  from------                निति ... भारत विकाश परिषद्
 ................... આજે નીતિ ભારત વિકાસ પરિષદ નો અંક વાચ્યો તેમાંથી આ વિષય સારો લાગ્યો... કદાચ તમને પણ ગમશે.  ......... 
                       





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