सुप्रभात मित्रो...
सूर्य नारायण ... बहुत जल्दी ही अपनी नर्म किरणों को गर्मी मे परिवर्तित कर रहे है....
ऐसा लग रहा है जैसे वो भी अपना गुस्सा निकाल रहे हो... ... ..
ऐसे मे निम् का एक पेड़ घटादार सूर्य नारायण के गुस्से को सांत करने की कोशिश करते हुए .. अपनी शाखा ओ को मंद मंद पवन देवता से साथ मिलकर मस्त हो रहा है..
वही मस्ती ... इस भयावह गर्मी मे हमें सांति एवं ठंडक का एहसास दिलाती है....
जैसे सूर्य नारायण के पुन्य प्रकोप से एक पेड़ हमें ... बचाता है वैसे ही सर्वतोभद्र संस्कार ... एक सोच ... हमें इस जीवन के पुण्य प्रकोप से .....रक्षा .... प्रदान करती है,,,
और ......... सूर्य नारायण का प्रकोप सांत होने के बाद जब वरुण देव्र्ता अपनी सवारी लेकर
आयेंगे तब भी येही पेड़ हमारी छाते के रूप मे .. हमारी रक्षा कने के लिए तैयार ... रहता है..
क्योकि वोह सर्वतो भद्र संस्कार के बारेमें सोचता है...
अगर एक पैड एक ही जगह पर स्थिर रहकर . इतना कुछ कर सकता है तो हम क्या नहीं कर सकते ...

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