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बुधवार, 19 सितंबर 2012

रिटेल का होलसेल विरोध

रिटेल का होलसेल विरोध
    क्या हो रहा है .....आज भारत बंद ......सभी  पार्टी बंद को समर्थन करती है .......और दूसरी तरफ
से वही लोग सरकार का समर्थन भी करते है ...सोनियाजी की सरकार  पुरे देश को सिर्फ 6 सिलिंडर देना चाहती ..है ..और वही  सोनियाजी कोंग्रेस शाशित राज्यों मैं 3 सिलिंडर का दान करती है ..कैसी नीतिया चला रही है ....हमारी सरकार ......... फिर भी यही चलेगा .......क्यों ............???????????????????????????????????????????????????????????????
    इसी सवाल का उतर ढूंढ़ते  हुए हमें करीबन 65 साल तो लग ही गए ...और ..कितने नए सवाल पैदा भी कर दिए .....???????
                जो एक उम्मीद बनकर   सामने आये  थे ..आज  वोह भी ...................??? ???? एक प्रश्नार्थ  बनकर  रह गए है .....



15 अगस्त 1947 से पहले हमारा शासन अंगेजो के कायदे कानून और उनकी ही निगरानी मैं चलता था ..और 15 अगस्त 1947 के बाद मैं कायदे कानून तो रहे मगर जो उनकी निगरानी थी वोह उठ गयी ..और उनकी जगह हमें लोकशाही मतलब हमारे अपने चुने हुए लोगो की निगरानी मैं उन्ही कायदों का लाभ  हम  ले रहे है ....कितना लाभ मिला ये तो जिनको मिला है वही  कह ...सकते है ...........

आज की तारीख मे ,
Photo

१) २५ करोड़ भुखमरी के कगार पर

२) ५० करोड़ लोग ग़रीबी रेखा के नीचे

३) हर साल, करोड़ो बच्चे ५ साल की उम्र तक, कुपोषण से मरते बच्चे

४) करोडो माए सुरक्छित प्रसूति की व्यवस्था ना होने से मर जाती है

५) करोड़ो लोग basic & higher...education से वंचित है

६) कई लाख स्कूल बिना टीचर के चल रहे है


७) कई करोड़ हर साल डॉक्टर और दवाए नही मिलने से मर जाते है

८) शहरो के अंधाधुन बढ़ते आधुनिकीकरण के कारण बढ़ते प्रदूषण की वजह से करोडो लोग हज़ारो बीमारिओ के गिरफ़्त मे

९) मजबूरी मे करोड़ो मज़बूर स्त्रिया वेस्या-वृत्ति के दलदल मे

१०) करोडो बालमजदूर
Photo: आज की तारीख मे ,
१) २५ करोड़ भुखमरी के कगार पर
२) ५० करोड़ लोग ग़रीबी रेखा के नीचे 
३) हर साल, करोड़ो बच्चे ५ साल की उम्र तक, कुपोषण से मरते बच्चे 
४) करोडो माए सुरक्छित प्रसूति की व्यवस्था ना होने से मर जाती है
५) करोड़ो लोग basic & higher education से वंचित है
६) कई लाख स्कूल बिना टीचर के चल रहे है 
७) कई करोड़ हर साल डॉक्टर और दवाए नही मिलने से मर जाते है 
८) शहरो के अंधाधुन बढ़ते आधुनिकीकरण के कारण बढ़ते प्रदूषण की वजह से करोडो लोग हज़ारो बीमारिओ के गिरफ़्त मे 
९) मजबूरी मे करोड़ो मज़बूर स्त्रिया वेस्या-वृत्ति के दलदल मे 
१०) करोडो बालमजदूर 
११)करोड़ो लोगो की पहुच से दूर होती उच्च-शिक्षा 
१२) करोड़ो लोग नशा-खोरी के गिरफ़्त मे 
१३) हर साल दंगे मे लाखो मारे जाते लोग 
१४)किसानो की दिन-ब-दिन बढ़ती आत्महत्याए 
१५) नीजिकरण के नाम पर उद्योगपतियो को कौड़ियो के दाम पर बिकती सरकारी संपत्तिया 
१६)संस्कृति / परंपरा के नाम पर दहेज के दबाव मे मरता करोडो परिवार 
१७) धर्म के नाम पर लूटते करोड़ो लोग 
१८)अंधविस्वास के दलदल मे फसते नादान मूर्ख लोग 
१८) उदारीकरण / नीज़ीकरण / वैसवीकरण [liberalisation /privatisation /globelisation ] के नाम पर multinational companies & corporate world के हाथो बिकते ज़मीन और लोग=============लिस्ट बहुत लंबी है ,,खैर छोड़िए ....... BharatPress

११)करोड़ो लोगो की पहुच से दूर होती उच्च-शिक्षा

१२) करोड़ो लोग नशा-खोरी के गिरफ़्त मे


१३) हर साल दंगे मे लाखो मारे जाते लोग

१४)किसानो की दिन-ब-दिन बढ़ती आत्महत्याए

१५) नीजिकरण के नाम पर उद्योगपतियो को कौड़ियो के दाम पर बिकती सरकारी संपत्तिया

१६)संस्कृति / परंपरा के नाम पर दहेज के दबाव मे मरता करोडो परिवार


१७) धर्म के नाम पर लूटते करोड़ो लोग

१८)अंधविस्वास के दलदल मे फसते नादान मूर्ख लोग

१८) उदारीकरण / नीज़ीकरण / वैसवीकरण [liberalisation /privatisation /globelisation ] के नाम पर multinational companies & corporate world के हाथो बिकते ज़मीन और लोग=============लिस्ट बहुत लंबी है ,,खैर छोड़िए .......          



Photo: wait ........ wait ........... wait ................. for whats ...?
for next election.?
for next pm...?
for next super pm...?
or ......................for next ..............?????????????
भारत की सरकार ने 1952 से एक पंचवार्षिक योजना शुरू की जो औसतन 10 लाख करोड़ का होता है। अभी तक हमारे देश में ग्यारह पंचवार्षिक योजनायें लागू हो चूकी हैं, मतलब अभी तक हमारी सरकार 110 लाख करोड़ रूपये खर्च कर चूकी है और गरीबी, बेकारी, भुखमरी रुक...ने का नाम ही नहीं ले रही है । अंग्रेज जब थे तो ऐसी कोई योजना नहीं थी इस देश में क्योंकि वो विकास पर कुछ भी खर्च नहीं करते थे और तब हमारी गरीबी नियंत्रण में थी लेकिन जब से हमने पंचवार्षिक योजना शुरू की हमारी गरीबी भयंकर रूप से बढ़ने लगी और बढती ही जा रही है कहीं रुकने का नाम ही नहीं ले रही है । अगर भारत सरकार उन पैसों को (जिसे उसने इन पंचवार्षिक योजनायों पर खर्च किया) सीधा हमारे लोगों को बाँट देती तो आज एक-एक भारतीय के पास नौ-साढ़े नौ लाख रूपये तो होते ही (मैं एक आदमी की बात कर रहा हूँ एक परिवार की नहीं) और सभी भारतीय कम से कम लखपति तो होते ही। See More...............................

               .                               इस हालत मैं हमें क्या करना चाहिए ...तो इसके बारे मैं मैंने एक ब्लॉग पढ़ा था जो पूरा यहाँ पेस्ट कर रहा हूँ।।।।
वर्तमान हालात और युवाओं की जिम्मेदारी



चुनौतियाँ हर सदी में अलग-अलग होती है
विश्वक्रांति एवं सांस्कृतिक सदभाव का संवाहक देश आज आतंकवाद और नक्सलवाद के विस्फोटों के समस्याओं से ग्रस्त है
दूसरी बड़ी समस्या है घुसपैठ एवं उसके कारण हो रहे जातीय-सांप्रदायिक हिंसा जो देश की अखंडता के लिए खतरा बना हुआ है
बहार देश से जो घुसपैठिये आते हैं और वो युवाओं के हक़ को भी मार जाते हैं
आज समूचा राष्ट्र भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है
कभी विश्वगुरु के नाम से विख्यात भारतवर्ष आज विदेशियों के सामने भिक्षापात्र लेकर भटक रहा है
भ्रष्टाचार के कारण आज युवावर्ग को रोजगार नही मिल रही है
आज सम्पूर्ण समाज नेत्रित्वाहीं हो गया है
राजीनीति भ्रष्टाचार एवं अपराध का पर्याय बन गया है और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का लक्ष्य अँधेरी गलियों में गूम हो गया है
राष्ट्रीय असंतोष, अव्यवस्था, आज देश की रुग्ण में स्थिति को दर्शा रही है
देश में व्याप्त इन चुनौतियों से निपटारा हेतु युवाओं को अपने मन से निराशा एवं हताशा निकाल देना चाहिए
अपनी शक्तियों पर अपनी छमता एवं प्रतिभा अटूट विश्वास जगाना होगा
ठीक उसी प्रकार जैसे “नेपोलियन” ने कहा था की “असंभव” शब्द उसकी शब्दावली में है ही नही इस प्रकार के आत्मविश्वास दृढ़तापूर्वक स्थापित करने पर ही युवा वर्तमान चुनौतियाँ का सामना करने में सफल हो सकेंगे, या फिर हमें अगर वर्तमान चुनौतियों का सफलतापूर्ण सामना करना है तो युवाओं के आदर्श पुरुष स्वामी विवेकानंद के बात को आत्मसात करना होगा
उन्होंने कहा था की इंग्लैण्ड में राजीनीतिक सत्ता ही उसकी जीवन शक्ति है परन्तु भारतवर्ष में धार्मिक जीवन ही राष्ट्रीय जीवन का केंद्र है
अगर हम 100 वर्ष कही गई इस बात को गौर से देखें तो ऐसा लगता है कि आज जो हमारी स्थिति है और जो चुनौतियाँ हमारे सामने आ रहे हैं उसका कारण है कि हम अपने धर्म पथ से भटक गये हैं, अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं कि उपेक्षा करने लगे हैं
धार्मिक जीवन के द्वारा ही हम स्वयं को उन्नति के मार्ग पर ले जा सकेंगे
वर्तमान चुनौतियां का सामना करने हेतु हम युवाओं को साथ में आगे बढ़ना होगा तब संभव है कि आगे चलकर और भी लोग साथ आयेंगे


इन चुनौतियों से जूझने का, कष्ट सहने का, कठोर परिश्रम का साहस ही हमें सफल बनाएगी तभी राष्ट्र के वर्तमान चुनौतियों का सामना कर सकेंगे
हमेशा राष्ट्रीय गौरव कि सुरक्षा के लिए युवाओं ने ही कदम बढ़ाएं हैं
संकट चाहे सीमाओं का हो या संकट सामाजिक एवं राजनितिक इसके समाधान के लिए अपने देश के युवाओं ने सर्वस न्योछावर करने में कोई कसर नही छोड़ी
देश का स्वतंत्रता संग्राम इस बात का साक्षी रहा है
सन 1857 से लेकर 1947 तक राष्ट्रभक्ति एवं क्रांति के भावों का आरोपण करने वाले युवाओं कि भूमिका अग्रणी थी
इस देश के सबसे महान एवं युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने मात्र 18 वर्ष के आयु में 11 अगस्त सन 1908 में देश के आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए
फांसी पर चदते वक़्त उनका उदगार था:-

हांसी-हंसी चाड्बे फांसी, देखिले जगतवासी,
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एक बार विदाय दे माँ, आमी धुरे आसी



अर्थात दुनिया देखेगी और मैं हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ जाऊंगा, हे भारत माँ मुझे विदा दो, मैं बार-बार तुम्हारी कोख से जन्म लूँगा, और ऐसे महान क्रांतिकारी से प्रेरणा लेकर और आत्मसात कर वर्तमान चुनौतियों के साथ संघर्ष में लग जाना चाहिए।।।।।।।।।।।।
 






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